नई दिल्ली, 22 जुलाई 2026। देश के विभिन्न राज्यों में लगातार हो रही बारिश ने केवल सड़क और रेल यातायात ही नहीं, बल्कि बिजली आपूर्ति और अन्य शहरी सेवाओं पर भी दबाव बढ़ा दिया है। कई शहरों में जलभराव, तेज हवाओं और पेड़ गिरने की घटनाओं के कारण बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई, जबकि नगर निगमों और बिजली वितरण कंपनियों ने स्थिति को सामान्य बनाए रखने के लिए विशेष नियंत्रण कक्ष सक्रिय कर दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि मानसून के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तकनीकी टीमें चौबीसों घंटे काम कर रही हैं।
बारिश के दौरान कई स्थानों पर बिजली के खंभों और तारों को नुकसान पहुंचने की घटनाएं सामने आईं। कुछ इलाकों में सुरक्षा कारणों से अस्थायी रूप से बिजली आपूर्ति रोकनी पड़ी ताकि मरम्मत कार्य सुरक्षित तरीके से किया जा सके। बिजली विभाग ने स्पष्ट किया कि यह कदम लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया और जैसे ही स्थिति सामान्य हुई, आपूर्ति बहाल कर दी गई।
बिजली वितरण कंपनियों ने सभी फील्ड इंजीनियरों और तकनीकी कर्मचारियों की छुट्टियां सीमित कर दी हैं। प्रत्येक जिले में त्वरित कार्रवाई दल (Quick Response Teams) गठित किए गए हैं, जिन्हें शिकायत मिलते ही मौके पर पहुंचकर समस्या का समाधान करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा मोबाइल मरम्मत वाहन और आवश्यक उपकरण भी संवेदनशील क्षेत्रों में पहले से उपलब्ध कराए गए हैं।
नगर निगमों ने भी बारिश के दौरान बिजली व्यवस्था सुरक्षित रखने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है। जलभराव वाले क्षेत्रों में खुले बिजली के तारों, क्षतिग्रस्त ट्रांसफार्मरों और खंभों की नियमित जांच की जा रही है। जहां भी खतरे की संभावना दिखाई देती है, वहां तत्काल सुरक्षा घेरा बनाकर मरम्मत का कार्य शुरू किया जाता है ताकि कोई दुर्घटना न हो।
विशेषज्ञों ने नागरिकों को बारिश के दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। यदि किसी स्थान पर बिजली का तार टूटा हुआ दिखाई दे या पानी में डूबा हुआ हो, तो उसके पास जाने से बचें और तुरंत बिजली विभाग या स्थानीय प्रशासन को सूचना दें। जलभराव वाले क्षेत्रों में बिजली के उपकरणों का उपयोग करते समय भी अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
अस्पतालों, जलापूर्ति केंद्रों, मेट्रो स्टेशनों, रेलवे स्टेशनों और अन्य आवश्यक सेवाओं को निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने के लिए बैकअप पावर सिस्टम की व्यवस्था की गई है। कई सरकारी संस्थानों में डीजल जनरेटर और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत तैयार रखे गए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में आवश्यक सेवाएं बाधित न हों।
बारिश के कारण जलापूर्ति व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है। इसलिए नगर निगमों ने जल शोधन संयंत्रों और पंपिंग स्टेशनों की निगरानी बढ़ा दी है। अधिकारियों ने बताया कि पेयजल की गुणवत्ता की नियमित जांच की जा रही है ताकि दूषित पानी की आपूर्ति न हो। नागरिकों को भी उबला या स्वच्छ पानी पीने की सलाह दी गई है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि बदलते मौसम और बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं को देखते हुए बिजली वितरण नेटवर्क को और मजबूत बनाने की आवश्यकता है। भूमिगत केबलिंग, स्मार्ट ग्रिड, आधुनिक ट्रांसफार्मर और रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम जैसी तकनीकों का उपयोग भविष्य में ऐसी समस्याओं को कम करने में मदद कर सकता है। कई राज्यों ने इस दिशा में योजनाओं पर काम भी शुरू कर दिया है।
आपदा प्रबंधन विभाग ने बिजली विभाग, नगर निगम और पुलिस के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। यदि किसी क्षेत्र में बिजली आपूर्ति बाधित होती है तो संबंधित विभाग संयुक्त रूप से स्थिति का आकलन कर शीघ्र समाधान सुनिश्चित करेंगे। इसके लिए नियंत्रण कक्षों के बीच सीधा संचार स्थापित किया गया है।
मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक कई राज्यों में तेज बारिश और तेज हवाओं की संभावना जताई है। ऐसे में बिजली विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे खराब मौसम के दौरान अनावश्यक रूप से बिजली के खुले उपकरणों को न छुएं और किसी भी तकनीकी समस्या की सूचना तुरंत हेल्पलाइन पर दें। साथ ही मोबाइल फोन, टॉर्च और आवश्यक उपकरणों को पहले से चार्ज रखने की भी सलाह दी गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के दौरान बिजली और अन्य शहरी सेवाओं को सुचारु बनाए रखना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होती है। हालांकि आधुनिक तकनीक, त्वरित प्रतिक्रिया दल और नागरिकों के सहयोग से अधिकांश समस्याओं का समय पर समाधान संभव है। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि आने वाले दिनों में भी सभी विभाग पूरी सतर्कता के साथ कार्य करेंगे ताकि नागरिकों को कम से कम असुविधा का सामना करना पड़े।