नई दिल्ली, 22 जुलाई 2026। देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया, जिसके चलते कई राज्यों में लगातार बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग ने पश्चिमी, मध्य और पूर्वी भारत के अनेक जिलों में भारी से बहुत भारी वर्षा की संभावना जताते हुए अलर्ट जारी किया। लगातार हो रही बारिश के कारण कई शहरों में जलभराव, ट्रैफिक जाम और सामान्य जनजीवन पर व्यापक असर देखने को मिला। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में राहत एवं बचाव दलों को तैनात कर दिया है और नागरिकों से सतर्क रहने की अपील की है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से आ रही नमी तथा सक्रिय मानसूनी ट्रफ के कारण बारिश की तीव्रता बढ़ी है। इसका असर उत्तर भारत, पश्चिम भारत और मध्य भारत के कई राज्यों में स्पष्ट रूप से देखा गया। कई स्थानों पर कुछ ही घंटों में अच्छी-खासी वर्षा दर्ज की गई, जिससे निचले इलाकों में पानी भर गया।
गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड सहित कई राज्यों में स्थानीय प्रशासन ने आपदा प्रबंधन की तैयारियां तेज कर दी हैं। नदी किनारे बसे गांवों में निगरानी बढ़ा दी गई है और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की योजना तैयार रखी गई है। जल संसाधन विभाग लगातार बांधों और जलाशयों के जलस्तर पर नजर बनाए हुए है।
भारी बारिश का सबसे अधिक असर शहरी क्षेत्रों में देखने को मिला। कई महानगरों में सड़कें पानी से भर गईं, जिससे वाहनों की गति धीमी हो गई और लंबा ट्रैफिक जाम लग गया। कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों, विद्यार्थियों और व्यापारियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में काफी समय लगा। कई स्थानों पर बस सेवाएं भी प्रभावित हुईं और स्थानीय प्रशासन को अतिरिक्त यातायात पुलिस तैनात करनी पड़ी।
ग्रामीण क्षेत्रों में बारिश किसानों के लिए राहत और चुनौती दोनों लेकर आई। जिन इलाकों में लंबे समय से वर्षा नहीं हुई थी, वहां किसानों ने इसे खरीफ फसलों के लिए लाभदायक बताया। दूसरी ओर जिन क्षेत्रों में लगातार तेज बारिश हो रही है, वहां खेतों में जलभराव की स्थिति बन गई। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने और फसलों की नियमित निगरानी करने की सलाह दी है।
पहाड़ी राज्यों में लगातार वर्षा के कारण भूस्खलन का खतरा भी बढ़ गया है। कई संवेदनशील मार्गों पर प्रशासन ने एहतियात के तौर पर निगरानी बढ़ा दी है। यात्रियों को केवल आवश्यक होने पर ही पहाड़ी क्षेत्रों की यात्रा करने की सलाह दी गई है। स्थानीय प्रशासन ने मशीनरी और राहत दलों को संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रखा है।
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि कई क्षेत्रों में तेज हवाओं और बिजली गिरने की घटनाएं भी हो सकती हैं। लोगों से खुले मैदानों, नदी-नालों और कमजोर संरचनाओं के पास जाने से बचने की अपील की गई है। मछुआरों को भी समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है, क्योंकि कुछ तटीय क्षेत्रों में समुद्र उग्र रहने की संभावना जताई गई है।
आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी जिला प्रशासन को निर्देश दिया है कि राहत सामग्री, चिकित्सा सहायता और बचाव उपकरणों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। राष्ट्रीय और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल की टीमें संवेदनशील जिलों में तैयार रखी गई हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता पहुंचाई जा सके।
स्वास्थ्य विभाग ने भी बारिश के मौसम में फैलने वाली बीमारियों को लेकर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। दूषित पानी और गंदगी के कारण डेंगू, मलेरिया और जलजनित रोगों का खतरा बढ़ सकता है। नागरिकों से साफ पानी पीने, आसपास सफाई रखने और जलभराव वाले क्षेत्रों से बचने की अपील की गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून का स्वरूप लगातार बदल रहा है। कई बार कम समय में अत्यधिक वर्षा होने से शहरी बुनियादी ढांचे पर दबाव बढ़ जाता है। उन्होंने शहरों में बेहतर जल निकासी प्रणाली विकसित करने और आपदा प्रबंधन योजनाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।
शाम तक अधिकांश प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन की टीमें सक्रिय रहीं और हालात पर लगातार नजर रखी गई। मौसम विभाग ने संकेत दिया कि अगले 24 से 48 घंटों तक कई राज्यों में बारिश का दौर जारी रह सकता है। नागरिकों से मौसम विभाग की आधिकारिक सूचनाओं का पालन करने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की गई है।
बारिश ने जहां एक ओर भीषण गर्मी से राहत दिलाई है, वहीं दूसरी ओर शहरी व्यवस्थाओं, यातायात और आपदा प्रबंधन की तैयारियों की भी परीक्षा ले ली है। आने वाले दिनों में मौसम की स्थिति पर सभी की नजर बनी रहेगी, क्योंकि लगातार बारिश से कुछ क्षेत्रों में बाढ़ और भूस्खलन जैसी चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं।