नई दिल्ली, 23 जुलाई 2026। देशभर में चल रहे खरीफ सीजन के बीच केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने गुरुवार को विभिन्न राज्यों में फसलों की स्थिति की समीक्षा की। बैठक में धान, मक्का, दालें, तिलहन, कपास और अन्य खरीफ फसलों की बुआई, वर्षा की स्थिति तथा किसानों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। मंत्रालय ने सभी राज्यों से कहा है कि जहां अच्छी वर्षा हुई है वहां किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाए और जिन क्षेत्रों में अधिक वर्षा या जलभराव की स्थिति है वहां फसलों को नुकसान से बचाने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं।
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष कई राज्यों में मानसून सामान्य से बेहतर रहने के कारण खरीफ फसलों की बुआई में तेजी आई है। हालांकि कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक बारिश और जलभराव किसानों के लिए चिंता का विषय बन गया है। कृषि मंत्रालय ने राज्य सरकारों को निर्देश दिए हैं कि जिला स्तर पर कृषि विभाग की टीमें गांव-गांव जाकर किसानों को फसल प्रबंधन, जल निकासी और रोग नियंत्रण के संबंध में सलाह दें। साथ ही जहां आवश्यक हो वहां कृषि वैज्ञानिकों की मदद भी उपलब्ध कराई जाए।
मंत्रालय ने बीज, उर्वरक और कीटनाशकों की उपलब्धता की भी समीक्षा की। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए कि किसानों को आवश्यक कृषि सामग्री समय पर और उचित मूल्य पर उपलब्ध हो। यदि किसी जिले में किसी सामग्री की कमी की सूचना मिलती है तो तुरंत वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। सरकार का कहना है कि किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
फसल सुरक्षा पर विशेष जोर देते हुए कृषि विशेषज्ञों ने कहा कि लगातार नमी और बारिश के कारण कई फसलों में कीट एवं रोग लगने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में किसानों को नियमित रूप से खेतों का निरीक्षण करना चाहिए और कृषि विभाग द्वारा सुझाए गए उपायों को अपनाना चाहिए। विशेषज्ञों ने यह भी सलाह दी कि अनावश्यक मात्रा में रासायनिक दवाओं का उपयोग करने से बचें और वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार ही उपचार करें।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की भी समीक्षा की गई। मंत्रालय ने राज्यों से कहा कि जिन किसानों ने योजना के तहत पंजीकरण कराया है, उन्हें योजना की सभी सुविधाओं की जानकारी समय पर दी जाए। यदि प्राकृतिक आपदा के कारण फसलों को नुकसान होता है तो सर्वेक्षण और मुआवजा प्रक्रिया में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। सरकार का उद्देश्य किसानों को समय पर राहत उपलब्ध कराना है।
कृषि विभाग ने किसानों से आधुनिक तकनीकों को अपनाने की भी अपील की है। ड्रोन के माध्यम से फसलों की निगरानी, मृदा परीक्षण, मौसम आधारित कृषि सलाह और डिजिटल कृषि सेवाओं का उपयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि नई तकनीकों के उपयोग से उत्पादन लागत कम की जा सकती है और फसल की गुणवत्ता भी बेहतर हो सकती है।
कृषि अर्थशास्त्रियों का मानना है कि खरीफ फसलें देश की खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यदि मौसम अनुकूल रहता है और किसानों को समय पर आवश्यक सहायता मिलती है तो इस वर्ष उत्पादन बेहतर रहने की संभावना है। वहीं जिन क्षेत्रों में अधिक वर्षा हुई है वहां प्रशासन और कृषि विभाग को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आवश्यकता होगी।
सरकार ने किसानों से अपील की है कि वे मौसम विभाग और कृषि विभाग द्वारा जारी सलाह का नियमित रूप से पालन करें। किसी भी समस्या की स्थिति में नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), कृषि अधिकारी या किसान हेल्पलाइन से संपर्क करें। मंत्रालय ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें किसानों के हितों की रक्षा के लिए मिलकर काम कर रही हैं और खरीफ सीजन को सफल बनाने के लिए हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
फिलहाल खरीफ फसलों की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। आने वाले दिनों में वर्षा की स्थिति और फसलों की प्रगति के आधार पर मंत्रालय फिर से समीक्षा करेगा तथा आवश्यकता पड़ने पर राज्यों को अतिरिक्त सहायता और नए दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।