नई दिल्ली, 23 जुलाई 2026। देश में सड़क दुर्घटनाओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्गों और प्रमुख राज्य मार्गों पर व्यापक सड़क सुरक्षा अभियान शुरू करने के निर्देश दिए हैं। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने सभी राज्यों और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर दुर्घटना संभावित स्थानों (ब्लैक स्पॉट) की पहचान, सड़क सुरक्षा उपायों और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को मजबूत करने पर जोर दिया। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि सड़क हादसों में कमी लाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि देशभर में कई ऐसे स्थान चिन्हित किए गए हैं जहां बार-बार सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। मंत्रालय ने राज्यों को निर्देश दिया है कि इन स्थानों पर तुरंत सुधारात्मक कार्य किए जाएं। इनमें सड़क संकेतक (साइन बोर्ड), बेहतर स्ट्रीट लाइट, स्पीड ब्रेकर, क्रैश बैरियर, रिफ्लेक्टर और स्पष्ट लेन मार्किंग जैसी व्यवस्थाओं को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही जहां आवश्यक हो वहां सड़क चौड़ीकरण और मोड़ों के सुधार का कार्य भी तेजी से पूरा करने को कहा गया है।
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने सभी राज्यों से यह भी कहा है कि सड़क सुरक्षा केवल इंजीनियरिंग का विषय नहीं है, बल्कि इसमें यातायात नियमों का पालन, प्रभावी पुलिस व्यवस्था और लोगों की जागरूकता भी समान रूप से महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य से स्कूलों, कॉलेजों, परिवहन कंपनियों और स्थानीय निकायों के सहयोग से सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाने की योजना बनाई गई है। इसमें हेलमेट पहनने, सीट बेल्ट लगाने, नशे की हालत में वाहन न चलाने और निर्धारित गति सीमा का पालन करने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को निर्देश दिए गए हैं कि टोल प्लाजा और व्यस्त मार्गों पर सीसीटीवी निगरानी, एंबुलेंस और क्रेन जैसी आपातकालीन सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। मंत्रालय ने कहा कि दुर्घटना होने की स्थिति में “गोल्डन ऑवर” के भीतर पीड़ितों को चिकित्सा सहायता मिलना अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए हाईवे एंबुलेंस नेटवर्क और ट्रॉमा सेंटरों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा रहा है।
मानसून के मौसम को देखते हुए विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश भी दिए गए हैं। लगातार बारिश के कारण कई स्थानों पर जलभराव, सड़क धंसने और फिसलन की समस्या उत्पन्न हो सकती है। ऐसे क्षेत्रों में समय रहते मरम्मत कार्य पूरा करने, चेतावनी बोर्ड लगाने और यातायात को सुरक्षित रूप से संचालित करने के निर्देश जारी किए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि मौसम संबंधी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए निगरानी और निरीक्षण अभियान लगातार जारी रहेगा।
परिवहन विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में सड़क दुर्घटनाओं का एक बड़ा कारण तेज गति, लापरवाही से वाहन चलाना, गलत दिशा में वाहन चलाना और यातायात नियमों का उल्लंघन है। उनका मानना है कि केवल सड़क निर्माण पर्याप्त नहीं है, बल्कि सड़क उपयोगकर्ताओं में अनुशासन और जागरूकता बढ़ाना भी उतना ही आवश्यक है। विशेषज्ञों ने आधुनिक तकनीक जैसे इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम, स्पीड मॉनिटरिंग कैमरा और एआई आधारित ट्रैफिक विश्लेषण प्रणाली के अधिक उपयोग की भी आवश्यकता बताई।
राज्य सरकारों को निर्देश दिए गए हैं कि जिला स्तर पर सड़क सुरक्षा समितियों की नियमित बैठकें आयोजित की जाएं और दुर्घटनाओं के कारणों का विश्लेषण कर सुधारात्मक कदम उठाए जाएं। इसके अलावा स्कूल बसों, सार्वजनिक परिवहन और मालवाहक वाहनों की नियमित फिटनेस जांच पर भी विशेष ध्यान देने को कहा गया है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि सड़क सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।
सरकार ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का उपयोग न करें, यातायात संकेतों का पालन करें और लंबी दूरी की यात्रा के दौरान पर्याप्त विश्राम लें। विशेष रूप से बारिश के मौसम में सावधानीपूर्वक वाहन चलाने की सलाह दी गई है ताकि दुर्घटनाओं की संभावना कम हो सके।
फिलहाल सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय देशभर में सड़क सुरक्षा अभियान की प्रगति पर लगातार नजर रखे हुए है। आने वाले महीनों में विभिन्न राज्यों से रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद आवश्यकतानुसार अतिरिक्त कदम उठाए जाएंगे। सरकार का कहना है कि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए प्रशासन, विशेषज्ञों और आम नागरिकों—सभी की सहभागिता आवश्यक है और इसी उद्देश्य से यह व्यापक अभियान आगे बढ़ाया जा रहा है।