नई दिल्ली, 22 जुलाई 2026। देश के अधिकांश हिस्सों में सक्रिय मानसून और कई राज्यों में लगातार हो रही भारी बारिश को देखते हुए भारतीय मौसम विभाग (IMD) और कृषि विभाग ने किसानों के लिए विस्तृत मौसम आधारित कृषि सलाह जारी की है। विशेषज्ञों ने कहा है कि आने वाले कुछ दिनों में मौसम तेजी से बदल सकता है, इसलिए किसानों को प्रत्येक कृषि कार्य स्थानीय मौसम पूर्वानुमान को ध्यान में रखकर ही करना चाहिए। विभाग का मानना है कि समय रहते सही निर्णय लेने से फसलों को होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार इस समय धान, मक्का, सोयाबीन, कपास, बाजरा, मूंग, उड़द और अन्य खरीफ फसलें अपनी महत्वपूर्ण अवस्था में हैं। ऐसे समय में अत्यधिक वर्षा या लगातार जलभराव से फसलों की जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है। किसानों को सलाह दी गई है कि खेतों में पानी अधिक समय तक जमा न रहने दें और आवश्यकता पड़ने पर जल निकासी की उचित व्यवस्था करें।
जिन क्षेत्रों में सामान्य से अधिक वर्षा हो रही है, वहां खेतों का नियमित निरीक्षण करने की सलाह दी गई है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार नमी के कारण फफूंद, तना गलन, पत्ती झुलसा और अन्य रोग तेजी से फैल सकते हैं। यदि किसी फसल में बीमारी के शुरुआती लक्षण दिखाई दें तो तुरंत नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि अधिकारी से संपर्क कर उचित उपचार कराया जाए।
दूसरी ओर जिन क्षेत्रों में अभी भी पर्याप्त वर्षा नहीं हुई है, वहां किसानों को उपलब्ध जल संसाधनों का सावधानीपूर्वक उपयोग करने की सलाह दी गई है। मौसम विभाग ने कहा है कि यदि अगले कुछ दिनों में बारिश की संभावना है तो अनावश्यक सिंचाई से बचना चाहिए। इससे पानी की बचत होगी और फसलों को भी संतुलित नमी मिल सकेगी।
फल और सब्जी उत्पादक किसानों के लिए भी विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। टमाटर, मिर्च, बैंगन, भिंडी, लौकी, कद्दू और अन्य सब्जियों की खेती करने वाले किसानों को खेतों की नियमित निगरानी करने तथा जलभराव से बचाव करने की सलाह दी गई है। फलदार बागानों में अतिरिक्त पानी निकालने और कमजोर शाखाओं को सहारा देने की भी सलाह दी गई है ताकि तेज हवा और बारिश से नुकसान कम हो।
पशुपालन विभाग ने किसानों से अपने पशुओं की विशेष देखभाल करने को कहा है। लगातार बारिश के दौरान पशुओं को खुले स्थान पर बांधने के बजाय सुरक्षित और सूखे स्थान पर रखा जाए। पशुओं के लिए साफ पीने का पानी, सूखा चारा और समय पर टीकाकरण सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है। पशु चिकित्सकों ने चेतावनी दी है कि बारिश के मौसम में संक्रमण और त्वचा संबंधी रोगों का खतरा बढ़ जाता है।
कृषि विभाग ने आधुनिक तकनीक के उपयोग पर भी जोर दिया है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे मौसम विभाग के मोबाइल ऐप, कृषि विज्ञान केंद्रों की सेवाओं और सरकारी पोर्टलों से नियमित मौसम अपडेट प्राप्त करें। कई राज्यों में जिला स्तर पर मौसम आधारित कृषि सलाह उपलब्ध कराई जा रही है, जिसका लाभ उठाकर किसान बुवाई, सिंचाई, उर्वरक प्रयोग और फसल सुरक्षा संबंधी निर्णय ले सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम का स्वरूप पहले की तुलना में अधिक अनिश्चित हो गया है। कभी अचानक अत्यधिक बारिश तो कभी लंबे समय तक सूखा जैसी परिस्थितियां कृषि उत्पादन को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे में पारंपरिक खेती के साथ-साथ वैज्ञानिक तकनीकों, मौसम पूर्वानुमान और आधुनिक कृषि प्रबंधन को अपनाना समय की आवश्यकता है।
सरकार ने भी राज्यों के कृषि विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे किसानों तक समय पर सही जानकारी पहुंचाएं। कई जिलों में कृषि अधिकारियों की टीमें गांवों का दौरा कर किसानों को मौसम आधारित खेती के बारे में जागरूक कर रही हैं। किसानों को यह भी बताया जा रहा है कि किसी भी प्राकृतिक आपदा की स्थिति में सरकार द्वारा उपलब्ध राहत योजनाओं और फसल बीमा का लाभ कैसे लिया जा सकता है।
कृषि अर्थशास्त्रियों का मानना है कि खरीफ सीजन भारतीय अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि किसान मौसम के अनुसार अपनी रणनीति बदलते हैं और वैज्ञानिक सलाह का पालन करते हैं तो प्रतिकूल परिस्थितियों में भी उत्पादन को बेहतर बनाए रखा जा सकता है। इसके लिए कृषि विभाग, मौसम विभाग और किसानों के बीच निरंतर संवाद आवश्यक है।
मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक कई राज्यों में मध्यम से भारी बारिश की संभावना व्यक्त की है। ऐसे में किसानों से अपील की गई है कि वे खेतों की नियमित निगरानी करें, मौसम संबंधी आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा रखें और बिना आवश्यकता के जोखिम न उठाएं। विशेषज्ञों का मानना है कि सावधानी, वैज्ञानिक जानकारी और समय पर निर्णय ही मानसून के दौरान कृषि को सुरक्षित रखने का सबसे प्रभावी उपाय है।