नई दिल्ली, 22 जुलाई 2026। देश के विभिन्न हिस्सों में लगातार हो रही बारिश के बीच स्वास्थ्य विभाग ने डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया और जलजनित बीमारियों के बढ़ते खतरे को देखते हुए व्यापक एडवाइजरी जारी की है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और राज्य स्वास्थ्य विभागों ने अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और नगर निकायों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के दौरान थोड़ी-सी लापरवाही भी संक्रामक रोगों के प्रसार का कारण बन सकती है।
स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार लगातार बारिश के कारण कई स्थानों पर जलभराव की स्थिति बन जाती है, जिससे मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल वातावरण तैयार होता है। इसके अलावा दूषित पानी और खराब स्वच्छता व्यवस्था के कारण डायरिया, टाइफाइड, हैजा और अन्य जलजनित रोगों का खतरा भी बढ़ जाता है। इसी को देखते हुए राज्यों को पहले से ही आवश्यक दवाइयों, जांच किट और चिकित्सा उपकरणों का पर्याप्त भंडार रखने के निर्देश दिए गए हैं।
देश के कई बड़े सरकारी अस्पतालों को अतिरिक्त बेड तैयार रखने और आपातकालीन सेवाओं को मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि जिला स्तर पर चिकित्सा अधिकारियों को संभावित मरीजों की संख्या बढ़ने की स्थिति में त्वरित कार्रवाई के लिए तैयार रहना चाहिए। कई राज्यों में विशेष चिकित्सा दलों का गठन भी किया गया है, जो जरूरत पड़ने पर प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराएंगे।
नगर निगमों और स्थानीय निकायों को भी सफाई अभियान तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। नालियों की सफाई, कूड़ा-कचरा हटाने, जलभराव वाले स्थानों से पानी निकालने और नियमित फॉगिंग करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मच्छरों की संख्या नियंत्रित करने के लिए केवल सरकारी प्रयास ही नहीं, बल्कि नागरिकों की भागीदारी भी अत्यंत आवश्यक है।
डॉक्टरों ने लोगों से अपने घरों और आसपास पानी जमा न होने देने की अपील की है। पुराने टायर, गमले, कूलर, पानी की टंकियां और खुले बर्तनों में जमा पानी समय-समय पर खाली करने की सलाह दी गई है। यदि किसी व्यक्ति को लगातार बुखार, तेज सिरदर्द, शरीर में दर्द, उल्टी या कमजोरी महसूस हो तो तुरंत चिकित्सकीय जांच कराने को कहा गया है। स्वयं दवा लेने के बजाय डॉक्टर की सलाह लेना अधिक सुरक्षित माना गया है।
बारिश के मौसम में खान-पान को लेकर भी विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि केवल उबला या साफ पानी ही पीना चाहिए और खुले में बिकने वाले कटे हुए फल तथा अस्वच्छ भोजन से बचना चाहिए। भोजन को हमेशा ढककर रखें और हाथ धोने की आदत को प्राथमिकता दें। बच्चों और बुजुर्गों को विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत कमजोर हो सकती है।
ग्रामीण क्षेत्रों में आशा कार्यकर्ताओं, आंगनबाड़ी कर्मचारियों और स्वास्थ्य विभाग की टीमों के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। गांवों में लोगों को साफ-सफाई, सुरक्षित पेयजल और मच्छरों से बचाव के उपायों की जानकारी दी जा रही है। कई राज्यों में स्कूलों और पंचायत भवनों में भी स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं ताकि अधिक से अधिक लोगों तक सही जानकारी पहुंच सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम का स्वरूप बदल रहा है, जिससे संक्रामक रोगों के फैलने का जोखिम भी बढ़ सकता है। इसलिए आधुनिक स्वास्थ्य निगरानी प्रणाली, समय पर जांच और जागरूकता अभियान पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गए हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि स्थानीय प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और नागरिकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए ताकि किसी भी संभावित महामारी को शुरुआती स्तर पर ही नियंत्रित किया जा सके।
सरकार ने सभी राज्यों से कहा है कि वे बीमारी के मामलों की नियमित निगरानी करें और किसी भी असामान्य वृद्धि की सूचना तुरंत केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजें। जिला स्तर पर नियंत्रण कक्ष सक्रिय कर दिए गए हैं और अस्पतालों को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। आपातकालीन एम्बुलेंस सेवाओं को भी चौबीसों घंटे तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।
मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में कई राज्यों में बारिश जारी रहने की संभावना है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखें, मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाएं और किसी भी प्रकार के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर सावधानी, साफ-सफाई और उचित उपचार के माध्यम से मानसून के दौरान फैलने वाली अधिकांश बीमारियों से प्रभावी रूप से बचा जा सकता है।