नई दिल्ली, 23 जुलाई 2026। देश में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों और ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों को देखते हुए केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को साइबर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों के पुलिस महानिदेशकों, साइबर सेल और संबंधित एजेंसियों से कहा है कि डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन बैंकिंग और सोशल मीडिया के माध्यम से होने वाली ठगी पर प्रभावी रोक लगाने के लिए संयुक्त अभियान चलाया जाए। साथ ही आम नागरिकों को जागरूक करने के लिए व्यापक जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने पर भी जोर दिया गया है।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल लेनदेन बढ़ने के साथ-साथ साइबर अपराधों के तरीके भी अधिक जटिल होते गए हैं। फर्जी कॉल, नकली बैंक अधिकारी बनकर संपर्क करना, ओटीपी और यूपीआई पिन हासिल करना, निवेश के नाम पर धोखाधड़ी, नौकरी दिलाने का झांसा, सोशल मीडिया अकाउंट हैक करना और फर्जी वेबसाइटों के माध्यम से लोगों से पैसे ठगने जैसे मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। ऐसे अपराधों पर रोक लगाने के लिए राज्यों को स्थानीय स्तर पर विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों से कहा है कि जिला स्तर पर साइबर पुलिस थानों और साइबर हेल्प डेस्क को अधिक सक्रिय बनाया जाए। जिन राज्यों में साइबर अपराधों की संख्या अधिक है, वहां विशेषज्ञ पुलिसकर्मियों की संख्या बढ़ाने, आधुनिक डिजिटल फॉरेंसिक उपकरण उपलब्ध कराने और जांच प्रक्रिया को तेज करने पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है। इसके अलावा विभिन्न एजेंसियों के बीच रियल-टाइम सूचना साझा करने की व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है ताकि अपराधियों तक जल्दी पहुंचा जा सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर अपराधी अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डीपफेक वीडियो, फर्जी मोबाइल एप्लिकेशन और नकली निवेश प्लेटफॉर्म का भी उपयोग करने लगे हैं। कई मामलों में अपराधी खुद को बैंक अधिकारी, सरकारी कर्मचारी या प्रतिष्ठित कंपनियों का प्रतिनिधि बताकर लोगों से गोपनीय जानकारी हासिल कर लेते हैं। इसके बाद उनके बैंक खातों से रकम निकाल ली जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीक जितनी तेजी से विकसित हो रही है, उतनी ही तेजी से सुरक्षा उपायों को भी मजबूत करने की आवश्यकता है।
बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों ने ग्राहकों से अपील की है कि वे किसी भी अज्ञात कॉल, संदेश या ईमेल पर भरोसा न करें। किसी भी परिस्थिति में ओटीपी, यूपीआई पिन, इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड या कार्ड की गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें। यदि किसी प्रकार का संदिग्ध लेनदेन दिखाई दे तो तुरंत बैंक, राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन और स्थानीय पुलिस को सूचना दें ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।
केंद्र सरकार स्कूलों, कॉलेजों और विभिन्न संस्थानों में भी साइबर जागरूकता अभियान चलाने की योजना पर काम कर रही है। इसके तहत विद्यार्थियों, व्यापारियों, वरिष्ठ नागरिकों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को डिजिटल सुरक्षा के बारे में जानकारी दी जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी सुरक्षा के साथ-साथ लोगों की जागरूकता भी साइबर अपराध रोकने का सबसे प्रभावी माध्यम है।
व्यापार संगठनों और उद्योग विशेषज्ञों ने भी सरकार की पहल का स्वागत किया है। उनका कहना है कि डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ साइबर सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना आवश्यक है। यदि नागरिक सुरक्षित महसूस करेंगे तो डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन सेवाओं पर उनका भरोसा और मजबूत होगा, जिससे देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलेगा।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में साइबर अपराध और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। इसलिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों, बैंकिंग संस्थानों, तकनीकी कंपनियों और आम नागरिकों के बीच समन्वय बढ़ाना जरूरी है। साथ ही नियमित प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक और तेज जांच प्रणाली विकसित करने की आवश्यकता भी लगातार बनी रहेगी।
फिलहाल केंद्र सरकार और राज्य एजेंसियां साइबर अपराधों पर नियंत्रण के लिए संयुक्त रणनीति पर काम कर रही हैं। सरकार का कहना है कि डिजिटल भारत के बढ़ते दायरे को सुरक्षित बनाए रखने के लिए साइबर सुरक्षा को लगातार मजबूत किया जाएगा और ऑनलाइन ठगी करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।