नई दिल्ली, 22 जुलाई 2026। देश के पहाड़ी राज्यों में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण भूस्खलन का खतरा काफी बढ़ गया है। उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, सिक्किम और पूर्वोत्तर के कई हिस्सों में प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी करते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों तक बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है, जिससे पर्वतीय क्षेत्रों में स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
पिछले 24 घंटों में कई पहाड़ी जिलों में सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई। लगातार बारिश के कारण पहाड़ों की मिट्टी कमजोर हो गई है, जिससे भूस्खलन की आशंका बढ़ गई है। कई स्थानों पर छोटे-बड़े पत्थर सड़कों पर गिरने की घटनाएं सामने आईं, जिसके कारण यातायात कुछ समय के लिए बाधित रहा। सीमा सड़क संगठन (BRO), लोक निर्माण विभाग और स्थानीय प्रशासन ने तत्काल मशीनें भेजकर मार्गों को साफ कराने का कार्य शुरू किया।
चारधाम यात्रा और अन्य धार्मिक स्थलों की ओर जाने वाले यात्रियों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने कहा है कि यात्रा पर निकलने से पहले मौसम की जानकारी अवश्य लें और केवल आधिकारिक मार्गों का ही उपयोग करें। यदि मौसम अत्यधिक खराब हो तो यात्रा स्थगित करना ही बेहतर होगा। पर्यटन विभाग ने भी पर्यटकों से जोखिम वाले क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से न जाने का अनुरोध किया है।
उत्तराखंड के कई पर्वतीय जिलों में जिला प्रशासन ने नियंत्रण कक्ष चौबीसों घंटे सक्रिय रखे हैं। आपदा प्रबंधन विभाग, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की टीमें संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात कर दी गई हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया जा सके।
हिमाचल प्रदेश में भी लगातार बारिश के कारण कई ग्रामीण संपर्क मार्ग प्रभावित हुए। कुछ गांवों में सड़कें बंद होने से लोगों को आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में कठिनाई का सामना करना पड़ा। प्रशासन ने वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था करने और आवश्यक सेवाएं सुचारु रखने के निर्देश दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने दूरदराज़ क्षेत्रों में चिकित्सा टीमों को भी तैयार रखा है।
भूस्खलन का सबसे अधिक प्रभाव पर्वतीय सड़कों पर देखने को मिलता है। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार वर्षा के दौरान पहाड़ों की मिट्टी पानी सोख लेती है, जिससे उसकी पकड़ कमजोर हो जाती है और चट्टानों के खिसकने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए बारिश के समय ढलानों के नीचे वाहन रोकना या पहाड़ी किनारों पर लंबे समय तक रुकना जोखिम भरा हो सकता है।
मौसम विभाग ने बिजली गिरने और तेज हवाओं की संभावना को देखते हुए भी लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। स्थानीय प्रशासन ने ग्रामीण क्षेत्रों में लाउडस्पीकर और मोबाइल संदेशों के माध्यम से लोगों तक मौसम संबंधी चेतावनी पहुंचानी शुरू कर दी है। नदी और नालों के किनारे रहने वाले लोगों को जलस्तर बढ़ने की स्थिति में सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए गए हैं।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बारिश से बागवानी और कृषि कार्य भी प्रभावित हो सकते हैं। सेब, सब्जियों और अन्य फसलों वाले क्षेत्रों में किसानों को जल निकासी की व्यवस्था बनाए रखने तथा पौधों की नियमित निगरानी करने की सलाह दी गई है। पशुपालकों से भी अपने पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर रखने का अनुरोध किया गया है।
आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों का मानना है कि पर्वतीय क्षेत्रों में आधुनिक चेतावनी प्रणाली और भू-वैज्ञानिक निगरानी को और मजबूत करने की आवश्यकता है। समय पर चेतावनी मिलने से जान-माल के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने स्थानीय समुदायों को भी आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण देने पर जोर दिया ताकि आपात स्थिति में लोग स्वयं प्रारंभिक सहायता प्रदान कर सकें।
शाम तक कई स्थानों पर राहत एवं बचाव दल लगातार सक्रिय रहे। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की। मौसम विभाग के अनुसार अगले 48 घंटों तक कई पहाड़ी क्षेत्रों में मध्यम से भारी बारिश जारी रह सकती है, इसलिए सतर्कता बनाए रखना आवश्यक होगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण अत्यधिक वर्षा और भूस्खलन जैसी घटनाओं की आवृत्ति बढ़ रही है। ऐसे में पर्वतीय राज्यों में मजबूत आधारभूत ढांचे, प्रभावी आपदा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में दीर्घकालिक योजनाएं लागू करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गई है। प्रशासन ने नागरिकों से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि सावधानी और समय पर जानकारी ही इस प्रकार की प्राकृतिक चुनौतियों से सुरक्षित रहने का सबसे प्रभावी उपाय है।