नई दिल्ली, 22 जुलाई 2026। देशभर में सक्रिय मानसून के बीच पर्यावरण संरक्षण और हरित आवरण बढ़ाने के उद्देश्य से विभिन्न राज्यों में व्यापक वृक्षारोपण अभियान चलाया जा रहा है। केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, स्थानीय निकायों, शैक्षणिक संस्थानों और सामाजिक संगठनों के सहयोग से लाखों पौधे लगाए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि मानसून का मौसम पौधारोपण के लिए सबसे अनुकूल माना जाता है, इसलिए इस अवधि का अधिकतम उपयोग करते हुए बड़े पैमाने पर हरित अभियान को गति दी जा रही है।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार इस वर्ष अभियान के दौरान सड़कों के किनारे, सरकारी भूमि, विद्यालय परिसरों, पार्कों, नदी किनारों और ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े स्तर पर पौधे लगाए जा रहे हैं। कई राज्यों ने स्थानीय जलवायु के अनुरूप देशी प्रजातियों के पौधों को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है ताकि पौधों के जीवित रहने की संभावना अधिक रहे और स्थानीय जैव विविधता को भी बढ़ावा मिल सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी नियमित देखभाल भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। पिछले वर्षों में कई स्थानों पर वृक्षारोपण तो हुआ, लेकिन रखरखाव के अभाव में बड़ी संख्या में पौधे नष्ट हो गए। इस बार कई राज्यों ने पौधों की निगरानी के लिए विशेष टीमें बनाई हैं और स्थानीय समुदायों को भी इस अभियान से जोड़ा जा रहा है।
पर्यावरणविदों का मानना है कि बढ़ते शहरीकरण और औद्योगीकरण के कारण हरित क्षेत्र लगातार कम हो रहे हैं। इसका सीधा प्रभाव वायु गुणवत्ता, तापमान और वर्षा के स्वरूप पर पड़ता है। यदि बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया जाए और मौजूदा जंगलों का संरक्षण सुनिश्चित किया जाए तो जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
विद्यालयों और महाविद्यालयों में भी पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। छात्रों को पौधे लगाने के साथ-साथ उनकी देखभाल की जिम्मेदारी भी दी जा रही है। कई स्थानों पर “एक छात्र–एक पौधा” जैसे अभियान चलाए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य युवाओं को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदार बनाना है।
ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायतों और स्वयं सहायता समूहों की मदद से सामुदायिक वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। गांवों में तालाबों, नहरों और खेतों की मेड़ों के आसपास पौधे लगाए जा रहे हैं ताकि मिट्टी का कटाव रोका जा सके और भूजल संरक्षण में भी सहायता मिले। किसानों को कृषि वानिकी (एग्रोफॉरेस्ट्री) अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय के अवसर मिल सकें।
विशेषज्ञों का कहना है कि पेड़ केवल ऑक्सीजन ही नहीं देते, बल्कि कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर जलवायु परिवर्तन की गति को धीमा करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा पेड़ वर्षा जल संरक्षण, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, जैव विविधता को सुरक्षित रखने और वन्यजीवों के लिए प्राकृतिक आवास उपलब्ध कराने में भी सहायक होते हैं।
नगर निकायों ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने घरों, कॉलोनियों और आसपास के सार्वजनिक स्थानों पर पौधे लगाएं तथा उनकी नियमित देखभाल करें। कई नगर निगम पौधारोपण के लिए निःशुल्क पौधे भी उपलब्ध करा रहे हैं। स्वयंसेवी संगठनों और सामाजिक संस्थाओं ने भी लोगों से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की है।
पर्यावरण विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि हरित क्षेत्र लगातार घटते रहे तो भविष्य में गर्मी की तीव्रता, वायु प्रदूषण और जल संकट जैसी समस्याएं और गंभीर हो सकती हैं। इसलिए वृक्षारोपण को केवल एक औपचारिक कार्यक्रम न मानकर दीर्घकालिक पर्यावरणीय निवेश के रूप में देखा जाना चाहिए। इसके लिए सरकार, निजी संस्थानों और आम नागरिकों को मिलकर कार्य करना होगा।
सरकार ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि लगाए गए पौधों की नियमित निगरानी की जाए और उनके संरक्षण के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। कई राज्यों में पौधारोपण अभियान की प्रगति का डिजिटल रिकॉर्ड भी तैयार किया जा रहा है ताकि लगाए गए पौधों के जीवित रहने की स्थिति का समय-समय पर मूल्यांकन किया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक सरकारी जिम्मेदारी नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। यदि हर व्यक्ति वर्ष में कम से कम एक पौधा लगाए और उसकी देखभाल सुनिश्चित करे, तो आने वाले वर्षों में देश का हरित क्षेत्र उल्लेखनीय रूप से बढ़ सकता है। मानसून का यह मौसम प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का सबसे उपयुक्त अवसर माना जा रहा है और इसी उद्देश्य से देशभर में वृक्षारोपण अभियान को नई गति दी जा रही है।