नई दिल्ली, 23 जुलाई 2026। राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और छात्र संगठनों का आंदोलन अब केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रह गया है। देश के अलग-अलग राज्यों से लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इस आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं। गुरुवार को आंदोलन स्थल पर हजारों प्रदर्शनकारी मौजूद रहे, जबकि जो लोग दिल्ली नहीं पहुंच सके उन्होंने ऑनलाइन फूड डिलीवरी और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से भोजन, पानी, दवाइयां और अन्य आवश्यक सामान भेजकर अपना समर्थन जताया। आंदोलन स्थल पर पूरे दिन खाने के पैकेट, बिस्कुट, फल, पानी की बोतलें, प्राथमिक उपचार सामग्री और अन्य जरूरी सामान लगातार पहुंचता रहा। (The Economic Times)
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह आंदोलन अब केवल एक परीक्षा या एक भर्ती प्रक्रिया का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह देशभर के युवाओं के भविष्य, रोजगार और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग का प्रतीक बन चुका है। CJP नेताओं ने स्पष्ट किया कि सरकार की ओर से की गई घोषणाओं के बावजूद उनका धरना तब तक जारी रहेगा, जब तक शिक्षा मंत्री के इस्तीफे, परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और पेपर लीक मामलों में जवाबदेही सुनिश्चित करने जैसे प्रमुख मुद्दों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती। (The Guardian)
जंतर-मंतर का माहौल गुरुवार को किसी बड़े जनआंदोलन जैसा दिखाई दिया। छात्र, अभिभावक, शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न राज्यों से आए युवा पूरे दिन धरना स्थल पर मौजूद रहे। कई स्वयंसेवकों ने भोजन वितरण, चिकित्सा सहायता और साफ-सफाई की जिम्मेदारी संभाली। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि आंदोलन को व्यवस्थित बनाए रखने के लिए अलग-अलग टीमों का गठन किया गया है, जो भोजन, चिकित्सा, सुरक्षा और मीडिया समन्वय जैसे कार्य देख रही हैं। (Reuters)
दिलचस्प बात यह रही कि कई ऑनलाइन डिलीवरी कंपनियों ने जंतर-मंतर के प्रदर्शन स्थल को एक डिलीवरी लोकेशन के रूप में स्वीकार कर लिया। इसके चलते देशभर से लोग मोबाइल ऐप के जरिए प्रदर्शनकारियों के लिए भोजन और अन्य आवश्यक सामग्री ऑर्डर कर रहे हैं। कई छात्रों ने बताया कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भी किसी जनआंदोलन का हिस्सा बन सकते हैं, लेकिन इस बार तकनीक ने आंदोलन को नई ताकत दी है। (The Economic Times)
CJP के प्रवक्ताओं ने कहा कि सरकार की ओर से बातचीत का प्रस्ताव आया था, लेकिन उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि बातचीत किसी बंद कमरे में नहीं बल्कि जनता के बीच होनी चाहिए। उनका कहना है कि यदि सरकार वास्तव में समाधान चाहती है तो उसके प्रतिनिधियों को जंतर-मंतर आकर प्रदर्शनकारियों से संवाद करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा और किसी भी प्रकार की हिंसा से संगठन का कोई संबंध नहीं है। (The Guardian)
दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी है। संसद मार्ग, जंतर-मंतर और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल, रैपिड एक्शन फोर्स और बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई है। अधिकारियों का कहना है कि प्रदर्शनकारियों को शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार है, लेकिन कानून-व्यवस्था बनाए रखना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है। बुधवार देर रात हुई झड़प के बाद पुलिस किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए लगातार निगरानी कर रही है। (The Print)
आंदोलन को लेकर सोशल मीडिया पर भी व्यापक चर्चा हो रही है। कई छात्र संगठनों, शिक्षकों और आम नागरिकों ने ऑनलाइन माध्यम से समर्थन व्यक्त किया है। वहीं कुछ लोगों ने अपील की है कि आंदोलन शांतिपूर्ण बना रहे और किसी भी प्रकार की अफवाह पर विश्वास न किया जाए। विभिन्न ऑनलाइन समुदायों में भी आंदोलन से जुड़ी सुरक्षा जानकारी, अपडेट और सहायता संदेश साझा किए जा रहे हैं। (Reddit)
राजनीतिक हलकों में भी इस आंदोलन को लेकर चर्चा तेज है। विपक्षी दल सरकार से छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील कर रहे हैं, जबकि सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि CJP का कहना है कि केवल आश्वासन पर्याप्त नहीं हैं और उन्हें लिखित एवं समयबद्ध कार्रवाई चाहिए। (The Guardian)
विशेषज्ञों का मानना है कि जंतर-मंतर का यह आंदोलन डिजिटल युग के जनआंदोलनों का नया उदाहरण बनकर उभरा है। जहां एक ओर हजारों लोग धरना स्थल पर मौजूद हैं, वहीं दूसरी ओर देशभर से ऑनलाइन माध्यम से मिल रहा सहयोग इस आंदोलन को लगातार ऊर्जा दे रहा है। उनका कहना है कि आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारियों के बीच होने वाली बातचीत इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय करेगी।
फिलहाल जंतर-मंतर पर आंदोलन जारी है। प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अडिग हैं और प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। देशभर की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और CJP के बीच आगे क्या बातचीत होती है और क्या इससे आंदोलन का कोई समाधान निकल पाता है। (Reuters)