नई दिल्ली, 23 जुलाई 2026। राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का आंदोलन अब केवल छात्रों तक सीमित नहीं रह गया है। गुरुवार को आंदोलन स्थल पर विभिन्न राज्यों से आए शिक्षक, पूर्व सैनिक, सामाजिक कार्यकर्ता, अभिभावक और कई नागरिक संगठनों के प्रतिनिधि भी बड़ी संख्या में पहुंचे। इससे आंदोलन का दायरा और व्यापक हो गया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह केवल एक परीक्षा या पेपर लीक का मुद्दा नहीं, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था, युवाओं के भविष्य और सरकारी जवाबदेही का प्रश्न है। इसी कारण समाज के विभिन्न वर्ग अब इस आंदोलन के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं। (Reuters)
जंतर-मंतर पर सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग जुटने लगे। कई स्वयंसेवी संगठनों ने प्रदर्शनकारियों के लिए पानी, भोजन, दवाइयों और प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था की। विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्रों ने भी मंच से अपने विचार रखे और कहा कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता तथा भर्ती प्रक्रिया में सुधार समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध की नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य की सुरक्षा के लिए है। (The Guardian)
CJP नेतृत्व ने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार की ओर से फास्ट-ट्रैक कोर्ट और शिक्षा सुधार के आश्वासन दिए गए हैं, लेकिन अभी तक उनकी प्रमुख मांग—केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे—पर कोई स्पष्ट निर्णय नहीं लिया गया है। संगठन ने कहा कि केवल मौखिक आश्वासन स्वीकार नहीं किए जाएंगे और जब तक लिखित रूप में ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक धरना जारी रहेगा। आंदोलन के नेताओं ने यह भी दोहराया कि भविष्य में सरकार के साथ होने वाली किसी भी बातचीत को सार्वजनिक बनाया जाना चाहिए ताकि पूरे देश को उसकी जानकारी मिल सके। (Reuters)
इस बीच दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर और संसद मार्ग के आसपास सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत कर दी है। अतिरिक्त पुलिस बल, रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) तथा केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। कई मेट्रो स्टेशनों पर भी सुरक्षा बढ़ाई गई है और संवेदनशील इलाकों में लगातार निगरानी रखी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति है, लेकिन कानून-व्यवस्था भंग करने की किसी भी कोशिश पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। (Reuters)
आंदोलन को देशभर से लगातार समर्थन मिल रहा है। सोशल मीडिया पर लाखों लोग प्रदर्शनकारियों के पक्ष में संदेश साझा कर रहे हैं। कई शहरों में छात्रों ने सांकेतिक प्रदर्शन भी किए हैं। हालांकि प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर वायरल हो रही अपुष्ट खबरों और फर्जी दस्तावेजों पर विश्वास न करें। हाल के दिनों में शिक्षा मंत्री के कथित इस्तीफे से जुड़ा एक फर्जी पत्र भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसे अधिकारियों ने भ्रामक बताया। (Reddit)
राजनीतिक स्तर पर भी इस आंदोलन का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। विपक्षी दल संसद और संसद के बाहर इस मुद्दे को लगातार उठा रहे हैं। कई नेताओं का कहना है कि सरकार को छात्रों की बात गंभीरता से सुननी चाहिए और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार के लिए समयबद्ध कार्ययोजना घोषित करनी चाहिए। दूसरी ओर सरकार का कहना है कि सुधार प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। (The Guardian)
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह आंदोलन भारत में युवाओं की बढ़ती अपेक्षाओं और पारदर्शी व्यवस्था की मांग को दर्शाता है। उनका कहना है कि यदि सरकार, शिक्षा विशेषज्ञों और छात्र संगठनों के बीच सकारात्मक संवाद स्थापित होता है, तो इससे भविष्य की परीक्षा प्रणाली अधिक विश्वसनीय बन सकती है। विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि केवल तत्काल निर्णय लेने के बजाय दीर्घकालिक सुधारों पर ध्यान देना आवश्यक है ताकि ऐसी परिस्थितियां दोबारा उत्पन्न न हों। (The Guardian)
फिलहाल जंतर-मंतर पर धरना लगातार जारी है। CJP ने घोषणा की है कि आने वाले दिनों में आंदोलन की रणनीति और व्यापक की जाएगी तथा यदि मांगों पर जल्द निर्णय नहीं हुआ तो देशभर में बड़े स्तर पर जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा। दूसरी ओर सरकार और प्रशासन की निगाहें भी इस आंदोलन पर टिकी हुई हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि बातचीत और राजनीतिक घटनाक्रम के बीच इस आंदोलन का अगला चरण किस दिशा में आगे बढ़ता है। (Reuters)