नई दिल्ली, 22 जुलाई 2026। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने देश के कई राज्यों के लिए नया मौसम अलर्ट जारी करते हुए अगले 48 घंटों तक भारी से अत्यधिक भारी बारिश की संभावना व्यक्त की है। विभाग के अनुसार मानसून पूरी तरह सक्रिय है और बंगाल की खाड़ी तथा अरब सागर से लगातार नमी मिलने के कारण उत्तर भारत, पश्चिम भारत, मध्य भारत और पूर्वोत्तर के कई हिस्सों में तेज वर्षा का दौर जारी रह सकता है। मौसम विभाग ने नागरिकों, किसानों, यात्रियों और स्थानीय प्रशासन से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार सक्रिय मानसूनी ट्रफ और कम दबाव के क्षेत्र के कारण कई राज्यों में लगातार बादल छाए रहने और रुक-रुक कर तेज बारिश होने की संभावना है। कुछ जिलों में बहुत कम समय में अत्यधिक वर्षा दर्ज हो सकती है, जिससे अचानक जलभराव, शहरी बाढ़ और छोटे नदी-नालों के उफान पर आने का खतरा बढ़ सकता है।
उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा सहित कई राज्यों के लिए विशेष चेतावनी जारी की गई है। इन राज्यों के जिला प्रशासन को पहले से आवश्यक तैयारियां पूरी रखने और संवेदनशील क्षेत्रों पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। कई जिलों में नियंत्रण कक्षों को चौबीसों घंटे सक्रिय रखा गया है।
दिल्ली-एनसीआर में भी अगले दो दिनों तक मध्यम से तेज बारिश होने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग का कहना है कि बारिश के कारण तापमान में गिरावट आएगी और लोगों को उमस से राहत मिलेगी, लेकिन साथ ही सड़कों पर जलभराव और ट्रैफिक जाम की समस्या भी बढ़ सकती है। ट्रैफिक पुलिस ने नागरिकों से यात्रा से पहले ट्रैफिक एडवाइजरी देखने की सलाह दी है।
गुजरात और महाराष्ट्र के तटीय क्षेत्रों में समुद्र की स्थिति भी सामान्य से अधिक उग्र रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी है। तटीय प्रशासन को भी सतर्क रहने और समुद्र किनारे रहने वाले लोगों को आवश्यक होने पर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।
पहाड़ी राज्यों में लगातार बारिश के कारण भूस्खलन और चट्टानें गिरने का खतरा बढ़ गया है। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में चारधाम यात्रा तथा अन्य पर्यटन स्थलों की ओर जाने वाले यात्रियों को मौसम की जानकारी लेकर ही यात्रा करने की सलाह दी गई है। सीमा सड़क संगठन और लोक निर्माण विभाग को संभावित अवरोधों को तुरंत हटाने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।
कृषि विभाग ने किसानों के लिए भी विशेष एडवाइजरी जारी की है। जिन क्षेत्रों में भारी वर्षा की संभावना है वहां किसानों को खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने, फसलों की नियमित निगरानी करने और मौसम साफ होने तक अनावश्यक कृषि कार्य टालने की सलाह दी गई है। पशुपालकों को भी अपने पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर रखने और पर्याप्त चारा व स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने बारिश के मौसम में फैलने वाली बीमारियों को लेकर भी सतर्क किया है। नागरिकों से दूषित पानी पीने से बचने, घरों के आसपास पानी जमा न होने देने और मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाने की अपील की गई है। अस्पतालों को भी संभावित आपात स्थितियों से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।
राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) और स्थानीय प्रशासन ने संवेदनशील जिलों में राहत एवं बचाव दलों की तैनाती बढ़ा दी है। नावें, एम्बुलेंस, राहत सामग्री और चिकित्सा टीमें तैयार रखी गई हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता पहुंचाई जा सके। अधिकारियों का कहना है कि नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून के स्वरूप में बदलाव देखने को मिल रहा है। कई क्षेत्रों में कम समय में अत्यधिक वर्षा होने लगी है, जिससे शहरी बाढ़ और प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बढ़ रहा है। ऐसे में आधुनिक मौसम पूर्वानुमान, मजबूत जल निकासी व्यवस्था और प्रभावी आपदा प्रबंधन प्रणाली विकसित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गई है।
मौसम विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक मौसम बुलेटिन पर भरोसा करें और सोशल मीडिया पर फैलने वाली अपुष्ट जानकारी से बचें। यदि किसी क्षेत्र में भारी बारिश, जलभराव या अन्य आपात स्थिति उत्पन्न होती है तो तुरंत स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करें।
विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर जारी चेतावनी, प्रशासन की सक्रियता और नागरिकों के सहयोग से मानसून के दौरान होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। आने वाले 48 घंटे कई राज्यों के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं, इसलिए सभी संबंधित विभागों को पूरी सतर्कता के साथ काम करने के निर्देश दिए गए हैं।