नई दिल्ली, 22 जुलाई 2026। देश के विभिन्न राज्यों में लगातार हो रही बारिश के कारण शहरों में जलभराव की समस्या को देखते हुए नगर निगमों और स्थानीय प्रशासन ने विशेष जल निकासी अभियान शुरू किया है। दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, मुंबई, पुणे, अहमदाबाद, लखनऊ और अन्य बड़े शहरों में नालों की सफाई, पंपिंग स्टेशनों की निगरानी और जलभराव वाले क्षेत्रों से पानी निकालने का कार्य तेज कर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि मानसून के दौरान नागरिकों को कम से कम परेशानी हो, इसके लिए सभी संबंधित विभागों को 24 घंटे सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
बारिश के बाद कई शहरों में प्रमुख सड़कें, अंडरपास, बाजार और आवासीय कॉलोनियां पानी में डूब गईं। इससे न केवल यातायात प्रभावित हुआ बल्कि लोगों के दैनिक जीवन पर भी व्यापक असर पड़ा। कई स्थानों पर वाहन घंटों तक जाम में फंसे रहे, जबकि पैदल चलने वाले लोगों को भी जलभराव के कारण कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। नगर निगमों ने तत्काल पंपिंग मशीनों और सफाई कर्मचारियों को प्रभावित क्षेत्रों में भेजा ताकि पानी जल्द से जल्द निकाला जा सके।
दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में कई संवेदनशील स्थानों की पहले से पहचान की गई थी, जहां हर वर्ष मानसून के दौरान जलभराव की समस्या उत्पन्न होती है। इस बार प्रशासन ने इन स्थानों पर अतिरिक्त पंप, जेसीबी मशीनें और तकनीकी कर्मचारियों की तैनाती की है। अधिकारियों ने बताया कि नालों की नियमित सफाई और जल निकासी मार्गों से अतिक्रमण हटाने का कार्य भी तेजी से किया जा रहा है।
मुंबई और अन्य तटीय शहरों में समुद्री ज्वार के समय भारी बारिश होने से जल निकासी की चुनौती और बढ़ जाती है। नगर प्रशासन ने बताया कि ऐसे क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखी जा रही है और मौसम विभाग से प्राप्त जानकारी के आधार पर पहले से तैयारियां की जा रही हैं। जलभराव वाले क्षेत्रों में यातायात पुलिस और आपदा प्रबंधन दलों को भी तैनात किया गया है।
गाजियाबाद, नोएडा और गुरुग्राम में कई आवासीय सोसाइटियों के आसपास पानी भरने की शिकायतें मिलीं। स्थानीय प्रशासन ने संबंधित विभागों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। कई स्थानों पर सीवर लाइन की सफाई कराई गई तथा अतिरिक्त पंपों के माध्यम से पानी निकालने का कार्य किया गया। अधिकारियों ने नागरिकों से भी अपील की कि वे नालियों में कूड़ा-कचरा न डालें, क्योंकि इससे जल निकासी बाधित होती है।
नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि शहरी क्षेत्रों में तेजी से बढ़ते निर्माण कार्यों और अनियोजित विकास के कारण प्राकृतिक जल निकासी मार्ग प्रभावित हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में इस समस्या से स्थायी समाधान के लिए आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम, वर्षा जल संचयन और वैज्ञानिक शहरी योजना को प्राथमिकता देनी होगी। केवल आपातकालीन उपायों से हर वर्ष आने वाली इस समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है।
स्वास्थ्य विभाग ने जलभराव वाले क्षेत्रों में विशेष सफाई अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। बारिश के बाद जमा पानी मच्छरों के पनपने का प्रमुख कारण बनता है, जिससे डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। नगर निगम ने फॉगिंग अभियान तेज करने के साथ-साथ लोगों से अपने घरों और आसपास पानी जमा न होने देने की अपील की है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि शहरी बाढ़ की समस्या केवल भारी बारिश का परिणाम नहीं है, बल्कि जल निकासी व्यवस्था की कमजोरियों और अनियोजित विकास का भी प्रभाव है। उन्होंने सुझाव दिया कि शहरों में हरित क्षेत्र बढ़ाए जाएं, वर्षा जल संचयन को अनिवार्य बनाया जाए और पुराने नालों का आधुनिकीकरण किया जाए। इससे भविष्य में जलभराव की घटनाओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि जलभराव वाले क्षेत्रों से गुजरते समय सावधानी बरतें और तेज बहाव वाले पानी में वाहन चलाने से बचें। यदि किसी क्षेत्र में अधिक पानी जमा हो या सीवर लाइन खुली दिखाई दे तो इसकी सूचना तुरंत नगर निगम या हेल्पलाइन नंबर पर दें। अधिकारियों ने यह भी कहा कि आपदा प्रबंधन और नगर निकायों की टीमें चौबीसों घंटे निगरानी कर रही हैं।
मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों तक कई राज्यों में मध्यम से भारी बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। ऐसे में नगर निकायों को लगातार सक्रिय रहने और राहत कार्यों में तेजी बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशासनिक तैयारी, आधुनिक तकनीक और नागरिकों के सहयोग से शहरी जलभराव की समस्या का प्रभाव काफी हद तक कम किया जा सकता है।
शाम तक अधिकांश शहरों में जल निकासी का कार्य जारी रहा और कई क्षेत्रों में स्थिति में सुधार भी देखा गया। हालांकि मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में फिर से भारी बारिश की संभावना जताई है, इसलिए प्रशासन ने नागरिकों से सतर्क रहने, मौसम संबंधी आधिकारिक सूचनाओं पर ध्यान देने और आवश्यक होने पर ही यात्रा करने की सलाह दी है।