नई दिल्ली, 22 जुलाई 2026। देश के विभिन्न राज्यों में सक्रिय मानसून के बीच बिजली गिरने की घटनाओं में वृद्धि दर्ज की गई है। भारतीय मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, ओडिशा और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों के लिए चेतावनी जारी करते हुए लोगों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश के मौसम में आकाशीय बिजली सबसे खतरनाक प्राकृतिक घटनाओं में से एक होती है, जिससे हर वर्ष जान-माल का नुकसान होता है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मानसून के दौरान वातावरण में नमी, तेज हवाएं और बादलों के बीच बनने वाला विद्युत आवेश बिजली गिरने की घटनाओं को बढ़ा देता है। कई बार तेज बारिश शुरू होने से पहले या बाद में भी बिजली गिर सकती है। इसलिए नागरिकों को केवल बारिश ही नहीं बल्कि गरज और चमक के समय भी पूरी सतर्कता बरतनी चाहिए।
मौसम विभाग ने किसानों, मजदूरों और खुले मैदानों में काम करने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। यदि आकाश में तेज गरज सुनाई दे या बिजली चमकती दिखाई दे तो तुरंत किसी सुरक्षित भवन या पक्के आश्रय में चले जाने की सलाह दी गई है। पेड़ों के नीचे खड़े होने, खुले खेतों में रुकने और धातु की वस्तुओं के पास रहने से बचने की भी अपील की गई है।
ग्रामीण क्षेत्रों में आकाशीय बिजली का खतरा अपेक्षाकृत अधिक माना जाता है, क्योंकि बड़ी संख्या में लोग कृषि कार्यों के लिए खुले खेतों में रहते हैं। कृषि विभाग ने किसानों से कहा है कि मौसम खराब होने पर खेती का कार्य कुछ समय के लिए रोक दें और मौसम सामान्य होने के बाद ही दोबारा शुरू करें। इससे दुर्घटनाओं की संभावना काफी कम हो सकती है।
शहरी क्षेत्रों में भी नागरिकों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। बिजली कड़कने के दौरान खुले मैदान, पार्क, छत या ऊंची इमारतों के खुले हिस्सों में जाने से बचने की अपील की गई है। बिजली के खंभों, टूटे हुए बिजली के तारों और जलभराव वाले क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है। यदि कहीं बिजली का तार गिरा हुआ दिखाई दे तो उसकी सूचना तुरंत बिजली विभाग या स्थानीय प्रशासन को देने की सलाह दी गई है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बिजली गिरने की घटनाओं में घायल व्यक्ति को तुरंत चिकित्सीय सहायता मिलना अत्यंत आवश्यक होता है। यदि किसी व्यक्ति पर बिजली गिरती है तो घबराने की बजाय तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सेवा को सूचना देनी चाहिए। डॉक्टरों के अनुसार समय पर उपचार मिलने से कई गंभीर मामलों में भी मरीज की जान बचाई जा सकती है।
राष्ट्रीय और राज्य आपदा प्रबंधन एजेंसियों ने भी मौसम विभाग की चेतावनी के बाद अपने नियंत्रण कक्ष सक्रिय कर दिए हैं। जिला प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि संवेदनशील क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाया जाए और लोगों तक समय पर मौसम संबंधी जानकारी पहुंचाई जाए। कई जिलों में मोबाइल संदेश, सोशल मीडिया और स्थानीय रेडियो के माध्यम से भी अलर्ट प्रसारित किए जा रहे हैं।
शिक्षा विभाग ने स्कूलों को भी मौसम की स्थिति पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं। कई स्थानों पर स्कूल प्रशासन ने विद्यार्थियों को बारिश और बिजली कड़कने के दौरान खुले मैदान में खेल गतिविधियों से दूर रखने की सलाह जारी की है। अभिभावकों से भी अनुरोध किया गया है कि वे बच्चों को मौसम खराब होने पर अनावश्यक रूप से घर से बाहर न भेजें।
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम की तीव्रता में बदलाव देखा जा रहा है, जिससे अत्यधिक वर्षा और आकाशीय बिजली जैसी घटनाओं की आवृत्ति बढ़ सकती है। ऐसे में समय पर चेतावनी प्रणाली, आधुनिक मौसम पूर्वानुमान और जनजागरूकता कार्यक्रमों की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि लोग मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनियों का पालन करें तो अधिकांश दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है।
मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक कई राज्यों में गरज-चमक के साथ बारिश जारी रहने की संभावना व्यक्त की है। विभाग ने नागरिकों से आग्रह किया है कि वे केवल आधिकारिक मौसम बुलेटिन पर भरोसा करें और किसी भी प्रकार की अफवाह या अपुष्ट जानकारी से बचें। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि आवश्यकता पड़ने पर स्थानीय स्तर पर अतिरिक्त अलर्ट जारी किए जाएंगे।
बारिश का मौसम जहां गर्मी से राहत देता है, वहीं बिजली गिरने जैसी प्राकृतिक घटनाएं गंभीर खतरा भी पैदा कर सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि थोड़ी-सी सावधानी और समय पर सही निर्णय लेकर जान-माल के बड़े नुकसान से बचा जा सकता है। इसलिए मौसम विभाग की सलाह का पालन करना, सुरक्षित स्थान पर रहना और जोखिम वाले क्षेत्रों से दूरी बनाए रखना सभी नागरिकों के लिए अत्यंत आवश्यक है।