–चेयरमैन पति और लाडले पुत्र पर क्षेत्र के विकास में बाधक बनने का आरोप
गाजियाबाद ( 10 जून 2026)- उत्तर प्रदेश विधान

सभा चुनावों में भले ही अभी वक्त हो लेकिन भावी उम्मीदवार जोड़ घटा के हिसाब में जुटने लगे हैं। हालांकि फिलहाल बीजेपी की रणनीति के आगे ज्यादातर विपक्ष का हौंसला सबके सामने ही है। फिर भी आज हम उत्तर प्रदेश की धौलाना विधानसभा का सरसरी जायज़ा लेने की कोशिश करते हैं। लेकिन उससे पहले आपसे ही एक सवाल पूछते हैं कि क्या किसी नगर पंचायत का चेयरमैन पति या उसका पुत्र अपनी ताकत या महज़ पैसे के दम पर किसी ईओ का तबादला करवा सकता है। वह भी जब कि प्रदेश में एक मजबूत, जनहितैषी और निष्पक्ष सरकार मौजूद हो।
दरअसल यह सवाल पूछने की वजह यहां पर गर्म एक कथित अफवाह या चर्चा है। कहा जा रहा है कि एक नगर पंचायत के चेयरमेन पति या चेयरमैन पुत्र की कथित मनमानी न मानने वाले ईओ को कथिततौर पर हटवाने के लिए प्लानिंग शुरू कर दी गई है। अफवाह तो यहां तक गर्म है कि इसके लिए कथित तौर पर खुलकर खर्च करने तक की बात की जा रही है। लेकिन चर्चा यह भी है कि ईओ जनहित में नियमानुसार कार्य करते हुए किसी भी राजनीतिक दबाव में झुकने को तैयार नहीं हैं। चर्चा यह भी है कि ईओ ने चेयरमैन पति और पुत्र को दबंगई से बाज़ रहने की हिदायत देते हुए यहां तक कह डाला कि नियमानुसार जनता के द्वारा जिसको चुना गया है वही नगर पंचायत का चेयरमैन है न कि परिवार के अन्य सदस्य। और नियमानुसार नगर पंचायत के कार्यों में हस्तक्षेप करने से चेयरमैन पति और लाडले पुत्र को रोक दिया गया है।
बहरहाल धौलाना विधानसभा चुनाव में भाग्य आजमाने का सपना देखने वाले उम्मीदवारों की पड़ताल करने से पहले यह चर्चा बेहद जरूरी थी कि आखिर जो लोग वोट देकर जिताने वाली जनता की उम्मीदों और क्षेत्र के विकास के लिए काम करने के बजाय सिर्फ मूंछ की लड़ाई और टकराव का रुख अख्तियार करते हुए चर्चा में ही बने रहना चाहते हैं, उनके लिए जनता के दिल में भी ज्यादा जगह बच नहीं पाती है। ऐसे में उनके लिए किसी दूसरे जनपद से अपनी पुश्तैनी संपत्ति के दम सांसद या अपने ही क्षेत्र से विधायक बनना भी आसान नहीं रह जाता है। और महज पैसे के दम राजनीतिक हाथी की सवारी का सपना पालने वाले यह लोग क्यों भूल जाते हैं कि उनकी इस तरह की गतिविधियों की खबर उनको टिकट देने वालों को भी रहती है। हाल के दिनों में कई दबंग नेताओं का जिस तरह से इलाज हुआ है, उसके बाद तो हर राजनीतिक पार्टी ऐसे विवादित लोगों से परहेज़ करने लगीं हैं,चाहे उनके ब्रीफकेस का साइज़ कितना ही बड़ा क्यों न हो।
धौलाना विधानसभा क्षेत्र से आने वाले समय में अनेक चेहरे किस्मत आजमा सकते हैं, जिनमें से सिर्फ एक जीतकर विधानसभा पहुंचेगा, जबकि कुछ हारने के बावजूद क्षेत्र में जनता के नेता के रूप में स्थापित भी हो सकते हैं। लेकिन कुछ ऐसे भी होंगे जो अपने पूर्वजों की बेशकीमती संपत्ति को ठिकाने लगाने के बावजूद, अपना राजनीतिक ठिकाना ही तलाशते रहेंगे। क्योंकि उनको लगता है जनता ने अगर उनको जिताकर कुछ बना दिया है तो यह वोट का नहीं उनके पैसे का कमाल है। और ये लोग जनता के मुद्दों और विकास से मुंह मोड़ लेते हैं, और यही वजह है कि ऐसे कथित नेता इतने खोखले साबित होते कि उनकी मनमानी के आगे कोई खुद्दार अफसर सरेंडर भी नहीं करता। और जाते जाते इतना और याद दिला दूं कि पहली बात तो वर्तमान जनहितैषी सिस्टम में किसी अफसर का तबादला इतना आसान नहीं है, लेकिन अगर किसी ने बेतहाशा कोशिश के दम पर करवा भी दिया तो नया अफसर इससे भी सख्त आ जाए,इसकी कोई गारंटी नहीं।
(अगली बार उत्तर प्रदेश विधानसभा के भावी उम्मीदवारों की चर्चा जारी रहेगी।)
(लेखक आज़ाद ख़ालिद टीवी जर्नलिस्ट हैं, दूरदर्शन आंखों देखी,सहारा समय, इंडिया टीवी, इंडिया न्यूज़ सहित कई नेशनल न्यूज चैनलों में कार्य कर चुके हैं।)