सर्जरी टीम ने गंभीर ओपन चेस्ट इंजरी से जूझ रहे युवक की जान बचाई
Ghaziabad
गाजियाबाद (8 जून 2026) यशोदा हॉस्पिटल, नेहरू नगर के डॉक्टरों ने बेहद दर्दनाक सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल युवक को नया जीवन दिया है। गाजियाबाद में अपनी तरह के इस पहले और बेहद चुनौतीपूर्ण मामले में अस्पताल के विभिन्न विशेषज्ञ विभागों ने मिलकर एक समन्वित प्रयास किया और युवक की जान बचाई।
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर हुए दर्दनाक सड़क हादसे मे घायल 31 वर्षीय युवक को 24 मई 2026 की सुबह लगभग 7 बजे जब मरीज को यशोदा हॉस्पिटल के इमरजेंसी विभाग में लाया गया, तो उसकी हालत अत्यंत नाजुक थी। हादसे के प्रभाव से उसके सीने में एक बड़ा और गहरा खुला घाव हो गया था, जिससे उसका बायां फेफड़ा और हृदय तक दिखाई दे रहे थे। उसकी कई पसलियां टूट चुकी थीं, कॉलर बोन का जोड़ खिसक गया था, छाती में खून भर गया था और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण मरीज शॉक की स्थिति में था। सांसें बेहद धीमी होने के कारण स्थिति पूरी तरह जानलेवा बनी हुई थी।
मरीज की गंभीर हालत को देखते हुए अस्पताल में तुरंत कई विभागों के विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक हाई-टेक टीम गठित की । इस जटिल सर्जरी का नेतृत्व गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल एवं मिनिमल एक्सेस सर्जन डॉ. प्रसन्ना रमना अरुमुगास्वामी ने किया। टीम में ऑर्थोपेडिक ट्रॉमा सर्जन डॉ. अजय पंवार, प्लास्टिक सर्जन डॉ. प्रोफ. (कर्नल) मोहम्मद आलम परवाज और पल्मोनरी विशेषज्ञ डॉ. बृजेश प्रजापत शामिल थे। इसके अलावा इमरजेंसी, आईसीयू, एनेस्थीसिया और रेडियोलॉजी विभाग के डॉक्टरों ने भी इस जीवनरक्षक उपचार में चौबीसों घंटे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
डॉक्टरों ने इस जटिल ऑपरेशन में आधुनिक और कम चीरे वाली वीडियो-असिस्टेड थोरेकोस्कोपिक सर्जरी (VATS) तकनीक का उपयोग किया। बिना बड़ी ओपन चेस्ट सर्जरी किए, डॉक्टरों ने इस तकनीक की मदद से छाती में जमा खून निकाला, फेफड़े की मरम्मत की, खिसके हुए जोड़ को सही किया और टूटी पसलियों को स्थिर कर घाव का पुनर्निर्माण किया।
सर्जरी के बाद मरीज को आईसीयू में वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था। फेफड़े की स्थिति सामान्य होने पर उसे वेंटिलेटर से हटा दिया गया और अब मरीज पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने घर लौट चुका है।
विशेषज्ञों ने इस बारे में बताया कि “यह हमारे सामने आए सबसे चुनौतीपूर्ण ट्रॉमा मामलों में से एक था। समय पर मिला इलाज, विभिन्न विशेषज्ञों का तालमेल और VATS जैसी आधुनिक सर्जिकल तकनीक की वजह से ही हम मरीज की जान बचाने में सफल रहे।”
डॉ. प्रसन्ना आर. अरुमुगास्वामी (मुख्य सर्जन)
“यह मामला साबित करता है कि किसी भी गंभीर ट्रॉमा मरीज की जान बचाने के लिए एक मजबूत और समग्र मेडिकल सिस्टम कितना जरूरी है, जहां आपातकालीन चिकित्सा से लेकर सर्जरी तक सब एक ही छत के नीचे उपलब्ध हो।”
डॉ. (मेजर) सचिन दुबे (मेडिकल डायरेक्टर, यशोदा हॉस्पिटल)