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33 के 3 पर उठा सवाल-बीजेपी भी कहीं तुष्टीकरण की नीति पर तो नहीं?

MUSLIM APPEASEMENT
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नई दिल्ली (17 जनवरी 2018)- पिछली सरकारों ख़ासतौर से कांग्रेस, समाजवादी, बहुजन समाज पार्टियों और अपने विपक्ष पर मुस्लिम तुष्टीकरण का आरोप लगाने वाली भारतीय जनता पार्टी इन दिनों कुछ लोगों ख़ुद सवालों के दायरे में है। सवाल उठने की वजह पिछले 33 दिनों में बीजेपी द्वारा मुस्लिमों को लेकर 3 बड़े फैसले बताए जा रहे हैं। चाहे तीन तलाक़ का मामला हो या फिर बग़ैर मेहरम के अकेले हज जाने वाली महिलाओं का फैसला या फिर अब हज सब्सिडी को ख़त्म करने का फैसला हो।
सबसे पहले तीन तलाक़ के मामले को ही लें तो देश की सबसे बड़ी पंचायत यानि संसद में देश भर में तलाकशुदा या पतियों द्वारा छोड़ी गई महिलाओं की चर्चा में गुजरात की लगभग 24 लाख महिलाओं की बात की गई जिनमें से केवल 2 लाख महिलाएं ही मुस्लिम हैं। जबकि एक भाभी जी समेत बाक़ी लगभग 22 लाख महिलाएं ग़ैर मुस्लिम या हिंदु या किसी दूसरे धर्म को मानने वाली हैं। इस सबके बावजूद मोदी ने मुस्लिम महिलाओं की फिक्र करते हुए उनको तलाक़ जैसी परेशानी से निजात दिलाने की कोशिश की है। यानि 22 लाख हिंदु या दूसरे धर्म की महिलाओं की परेशानी को नज़र अंदाज़ करते हुए उसके मुक़ाबले में केवल 2 लाख मुस्लिम महिलाओं को प्राथिमकता दी गई और लोकसभा में इसको लेकर बिल तक पास करा दिया गया। कुछ ऐसा ही हुआ हज पर बिना मेहरम यानि अकले जाने वाली महिलाओं को राहत दी गई है। हालांकि सच्चाई ये है कि ये फैसला सऊदी अरब सरकार था कि बगैर मेहरम के लेकिन कुछ दूसरी महिलाओं या ग्रुप के साथ हज को जाने वाली महिलाओं को सऊदी अरब सरकार ने ही आने की इजाज़त दी है। लेकिन बीजेपी की नरेंद्र मोदी सरकार और मुख़्तार अब्बास नक़वी मुस्लिम महिलाओं को राहत दिये जाने का दावा करने लगे हैं। ठीक इसी तरह से हलाल कमाई और अपनी मेहनत से हज करने का कॉंसेप्ट को पूरा करते हुए यानि अपनी हलाल और मेहनत की कमाई के अलावा किसी भी बाहरी मदद या सब्सिडी को कैंसल करने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। दरअसल हम आपको हज के बारे में बता दें कि इस्लाम में हर मुसलमान पर फर्ज़ इस इबादत के लिए ये हुकुम है कि ईमानदारी, मेहनत और हलाल कमाई से हज उस वक़्त ही किया जाए जब उसके ऊपर कोई दूसरा फर्ज़ न बचा हो यानि अपने बच्चों का लालन पालन या लड़कियों की शादी और किसी क़र्ज़ को अदाकर के हज जाने का हुकुम आया है। तो ऐसे में सरकार ने अगर उस सब्सिडी को बंद कर दिया है तो यक़ीनन मुस्लिमों को ख़ासतौर से इस्लाम के जानकार इस फैसले का स्वागत ही करेंगे। क्योंकि लाखों रुपए ख़र्च करने वाला सिर्फ एयरइंडिया को बचाए रखने या सरकार को राजनीति करने के लिए मुस्लिमों को एक ऐसी रक़म देने का नाम करती थी जिसके हलाल या हराम होने पर हो तो ऐसी सब्सिडी को बंद करना ही ठीक है। यानि ये तीनों फैसले लगभग वही हैं जिनसे फिलहाल मुस्लिमों को फायदा होना नज़र आता है। चर्चा ये भी है कि बीजेपी को उम्मीद है इससे जहां बीजेपी को मुस्लिम महिलाओं का वोट मिलने की उम्मीद है, लेकिन कुछ लोग बीजेपी को अगर तुष्टीकरण की नीति से जो़ड़कर देखें तो बीजेपी के लिए संकट की स्थिति हो जाएगी।
दऱअसल फिलहाल लगता यही है कि इन दिनों मोदी सरकार का पूरा फोकस देश के मुसलमानों पर नज़र आता है। अग आंकड़ों की बात करें तो पिछले 33 दिन में मोदी सरकार ने मुसलमानों से जुड़े तीन बड़े क़दम उठाए हैं। भारतीय हाजियों जो कि हज कमेटी के जरिए जाते हैं उन्ही को मिलने वाली सब्सिडी अब ख़्तम कर दी गई है। जिसका समझदार मुसलमान स्वागत ही करेंगे। ठीक इसी तरह 45 साल से ज्यादा उम्र की मुस्लिम महिलाएं अब बिना मेहरम यानि पुरुष अभिभावक के हज पर जा सकेंगी। इन सभी मामलों कुछ लोग सीधे तौर पर सियासत मान रहे हैं जबकि कुछ लोग इसको बीजेपी को तुष्टीकरण की राह पर चलते हुए देख रहे हैं। लोगों का मानना है कि 2018 चुनावी वर्ष के तौर पर देखा जाए तो ग़लत न होगा। क्योंकि इस साल 8 राज्यों में विधानसभा चुनाव हैं, जबकि ठीक अगले ही साल यानि 2019 में लोकसभा चुनाव होने हैं। सियासी गलियारों में चर्चा यही है कि मोदी सरकार इन कदमों से जो संदेश दे रही है, उसका राजनीतिक फायदा मिलने का शायद बीजेपी को उम्मीद है। हांलाकि बीजेपी मैसेज शायद ये देना चाहती है कि वो मुस्लिम तुष्टिकरण की बजाय मुस्लिम सशक्तिकरण के लिए पहल कर रही है।

लेकिन कहने वाले ये भी कह रहे हैं कि देश की जनता के सामने बहुत सी समस्याएं हैं और चाहे रोज़गार हो, या फिर महंगाई या फिर कोई मामला समस्याएं धर्म या समुदाय देखकर नहीं आतीं। ऐसे में केवल मुस्लिमों के 3 बड़े मुद्दों पर गंभीरता दिखाने वाली बीजेपी सरकार अपने पूरे कार्यकाल में बताए कि उसने आम और गरीब जनता के लिए क्या क्या किया है।

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आज़ाद ख़ालिद टीवी जर्नलिस्ट हैं, सहारा समय, इंडिया टीवी, वॉयस ऑफ इंडिया, इंडिया न्यूज़ सहित कई नेश्नल न्यूज़ चैनलों में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। Read more

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