Student movement in France फ्रांस में स्कूली व्यवस्था के खिलाफ भड़का छात्र आंदोलन

 कई शहरों में उग्र प्रदर्शन, आगजनी और तोड़फोड़

New Delhi नई दिल्ली (2अकतूबर2026) फ्रांस में स्कूली व्यवस्थाओं और शैक्षणिक सुधारों के विरोध में शुरू हुआ छात्रों का आंदोलन अब व्यापक अशांति में बदल चुका है। शांतिपूर्ण प्रदर्शन के तौर पर शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन देश के कई हिस्सों में हिंसक हो गया है। राजधानी पेरिस समेत मार्सिले, ल्योन और नांत जैसे प्रमुख शहरों की सड़कों पर भारी तोड़फोड़, आगजनी और सुरक्षा बलों के साथ तीखी झड़पों की खबरें सामने आ रही हैं।
सड़कों पर अराजकता
प्रदर्शनकारियों ने कई इलाकों में सार्वजनिक संपत्ति, सरकारी इमारतों और वाहनों को निशाना बनाया। दर्जनों वाहनों और कचरे के डिब्बों में आग लगा दी गई, जबकि कई व्यापारिक प्रतिष्ठानों और स्कूलों के गेटों पर तोड़फोड़ की गई। बिगड़ते हालात पर काबू पाने के लिए सरकार ने संवेदनशील इलाकों में भारी पुलिस बल और दंगा रोधी दस्तों की तैनाती की है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को कई स्थानों पर आंसू गैस के गोले और पानी की बौछारों का इस्तेमाल करना पड़ा। गृह मंत्रालय के अनुसार, सार्वजनिक शांति भंग करने और हिंसा में शामिल होने के आरोप में अब तक हजारों युवाओं को हिरासत में लिया जा चुका है।

शैक्षणिक सुधारों को लेकर असंतोष
इस विरोध प्रदर्शन की नींव बुनियादी स्कूली सुविधाओं में कमी, बजट कटौती, शिक्षकों की कमी और मूल्यांकन प्रणाली में किए गए हालिया बदलावों को लेकर रखी गई थी। छात्रों का कहना है कि सरकार की नीतियां छात्रों के भविष्य और शिक्षा की गुणवत्ता के साथ समझौता कर रही हैं। संवाद की कमी के चलते छात्रों का यह असंतोष धीरे-धीरे सड़कों पर उतर आया और उग्र रूप धारण कर लिया।

मंत्रियों के आधिकारिक दौरे रद्द
आंदोलन की गंभीरता और सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए सरकार बैकफुट पर नजर आ रही है। स्थिति की संवेदनशीलता के मद्देनजर कैबिनेट के कई वरिष्ठ मंत्रियों के पूर्व निर्धारित घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दौरे तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिए गए हैं। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री कार्यालय स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और आपातकालीन सुरक्षा समीक्षा बैठकें बुलाई गई हैं।

विपक्ष ने स्थिति को संभालने के सरकारी तरीके की आलोचना करते हुए तत्काल छात्रों से वार्ता करने की मांग की है, वहीं प्रशासन का कहना है कि शांति बहाल करना पहली प्राथमिकता है और हिंसा फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

 

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