दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट परिसर में एक विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 2026 NEET-UG पेपर लीक मामले में पहली सुनवाई शुरू की। यह अदालत सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत गठित की गई है।
अदालत ने आरोपी दिनेश बिवाल और विकास बिवाल की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई शुरू की। इन दोनों को NEET-UG पेपर लीक मामले में गिरफ्तार किया गया था।
यह फास्ट ट्रैक कोर्ट में इस मामले की पहली सुनवाई है। सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 को पेपर लीक को रोकने और परीक्षा प्रणाली की अखंडता को मजबूत करने के लिए लागू किया गया था।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने मई में बताया था कि प्राइवेट ट्यूशन सेंटरों के शिक्षकों और एजेंटों ने छात्रों से भारी रकम वसूलकर परीक्षा पेपर लीक किया था। इस मामले में 13 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने पेपर लीक को “घोर पाप” बताते हुए कहा था कि सरकार ने तुरंत कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि आरोपियों को सख्त से सख्त सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया गया है।
विपक्षी दलों ने इस मामले को संसद में भी उठाया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि पिछले एक दशक में 150 से अधिक पेपर लीक हुए हैं और किसी को सजा नहीं हुई।
सीजेपी के 36 दिन लंबे आंदोलन के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हो चुका है और नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में परीक्षा सुधार कार्य समूह का गठन हो चुका है।
फास्ट ट्रैक कोर्ट में इस मामले की तेजी से सुनवाई होने की उम्मीद है। अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख तय कर दी है।