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महाराष्ट्र के स्कूलों में चॉकलेट, चिप्स और कोल्ड ड्रिंक पर बैन, फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने जारी किए नए नियम

महाराष्ट्र में स्कूली बच्चों को स्वस्थ खानपान की ओर बढ़ावा देने के लिए बड़ा फैसला लिया गया है। राज्य के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने सभी सरकारी, सहायता प्राप्त (एडेड) और निजी स्कूलों में चॉकलेट, चिप्स, कोल्ड ड्रिंक और अन्य जंक फूड की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया है। इसके साथ ही स्कूल परिसरों और उनके 50 मीटर के दायरे में हाई फैट, हाई शुगर और हाई सॉल्ट (HFSS) वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री, प्रदर्शन और विज्ञापन पर भी रोक लगा दी गई है।

बच्चों के लिए पौष्टिक भोजन को मिलेगा बढ़ावा

FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे द्वारा जारी आदेश के अनुसार, स्कूल कैंटीन के मेन्यू में अब फलों, हरी सब्जियों, साबुत अनाज, दालों और डेयरी उत्पादों को प्राथमिकता देनी होगी। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि बच्चों को भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय पोषण संस्थान (ICMR-NIN) के पोषण संबंधी दिशा-निर्देशों के अनुरूप भोजन उपलब्ध कराया जाए।

2021 से लागू नियमों का अब होगा सख्ती से पालन

यह आदेश खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 30(1) के तहत जारी किया गया है। इसमें भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के ‘स्कूलों में बच्चों के लिए सुरक्षित भोजन और संतुलित आहार नियम, 2020’ को लागू करने पर जोर दिया गया है। ये नियम जुलाई 2021 से प्रभावी हैं, लेकिन कई स्कूलों में इनका पालन नहीं हो रहा था। इसी वजह से अब राज्यभर में सख्त कार्रवाई का फैसला लिया गया है।

कौन-कौन से स्कूल होंगे नियमों के दायरे में?

यह आदेश राज्य के सभी प्री-प्राइमरी, प्राइमरी, अपर प्राइमरी, सेकेंडरी स्कूलों, आवासीय विद्यालयों, छात्रावासों तथा राज्य बोर्ड, CBSE, ICSE और अन्य सभी शिक्षा बोर्डों से संबद्ध संस्थानों पर लागू होगा। स्कूल परिसर में संचालित कैंटीन, टक शॉप, मिड-डे मील किचन और अन्य खाद्य सेवा प्रदाताओं को भी इन नियमों का पालन करना होगा।

क्या-क्या नहीं बिकेगा?

FDA ने स्पष्ट किया है कि स्कूल परिसर और उसके 50 मीटर के दायरे में चॉकलेट, चिप्स, कोल्ड ड्रिंक, कैफीन युक्त ड्रिंक, हाई फैट, हाई शुगर और हाई सॉल्ट (HFSS) वाले खाद्य पदार्थ, अजीनोमोटो (MSG) युक्त फास्ट फूड, जैसे कुछ प्रकार का चाइनीज फूड जैसे खाद्य पदार्थों की बिक्री नहीं होगी। FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे ने कहा कि अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों की पूरी सूची विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध है और इसका उद्देश्य बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य प्रदान करना है।

स्कूलों को क्या करना होगा?

नए आदेश के तहत सभी स्कूलों को कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभानी होंगी। एक प्रशिक्षित नोडल अधिकारी की नियुक्ति करनी होगी। स्कूल के प्रवेश द्वार पर चेतावनी बोर्ड लगाने होंगे। कैंटीन संचालकों के FSSAI लाइसेंस प्रदर्शित करने होंगे। स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना होगा। स्कूल के डिजिटल प्लेटफॉर्म और कंप्यूटर सिस्टम पर जंक फूड के विज्ञापन नहीं दिखाए जा सकेंगे।

मान्यता पर भी पड़ सकता है असर

स्कूल शिक्षा विभाग को यह सुनिश्चित करना होगा कि पीएम पोषण और शालापोषण आहार योजना से जुड़े सभी खाद्य संचालकों के पास वैध लाइसेंस हो। वहीं, राज्य शिक्षा बोर्ड, CBSE और ICSE सहित सभी अफिलिएशन देने वाले बोर्डों को इन नियमों का पालन अनिवार्य शर्त बनाना होगा। यदि कोई स्कूल बार-बार नियमों का उल्लंघन करता है तो उसे कारण बताओ नोटिस जारी किया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर उसकी अफिलिएशन भी रद्द की जा सकती है।

साल में दो बार होगा निरीक्षण

FDA के आदेश के अनुसार, प्रत्येक स्कूल का साल में कम से कम दो बार खाद्य सुरक्षा अधिकारियों (FSO) द्वारा निरीक्षण किया जाएगा। इस दौरान कैंटीन के लाइसेंस, स्वच्छता, नोडल अधिकारी की नियुक्ति, चेतावनी बोर्ड और 50 मीटर के दायरे में जंक फूड की उपलब्धता की जांच होगी। इसके अलावा हर साल कम से कम एक बार खाद्य पदार्थों के नमूने भी जांच के लिए लिए जाएंगे।

नियम तोड़ने पर हो सकती है कड़ी कार्रवाई

एफडीए ने कहा है कि खाद्य सुरक्षा कानून के गंभीर उल्लंघन की स्थिति में फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 की धारा 59 के तहत कठोर दंड का प्रावधान है। गंभीर मामलों में दोषियों को आजीवन कारावास तक की सजा भी हो सकती है। प्रशासन का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य बच्चों को जंक फूड से दूर रखकर उन्हें स्वस्थ और संतुलित भोजन उपलब्ध कराना है।

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