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छात्रों पर पैलेट गन चलाने को लेकर सत्ता-पक्ष में बढ़ा टकराव; राहुल गांधी ने मांगा अमित शाह का इस्तीफा

Paper Leak News: दिल्ली में प्रदर्शनकारी पर पुलिस की कार्रवाई को लेकर संसद में बुधवार को फिर हंगामा हुआ। इस मुद्दे पर विपक्षी सांसदों के हमलों के बीच दो दिनों तक चली बहस के बाद लोकसभा में पेपर लीक से जुड़ा लोक परीक्षा संशोधन विधेयक 2026 ध्वनि मत से पारित हो गया। नेता विपक्ष राहुल गांधी द्वारा पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ की गई टिप्पणियों से सदन में हंगामा मच गया और सत्ता पक्ष के सांसदों ने कड़ा विरोध जताया।

दूसरी ओर सरकार ने विधेयक पारित होने का स्वागत किया। बहस का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह विधेयक परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के लीक होने की समस्या से निपटने के लिए सरकार की रचनात्मक सुझावों को शामिल करने, अनुभवों से सीखने और कानून को और मजबूत बनाने की तत्परता को दर्शाता है।

अमित शाह ने बिल के संबंध में किया पोस्ट

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने X पर एक पोस्ट में विधेयक पारित होने पर भारत के हर छात्र को बधाई देते हुए कहा कि यह विधेयक सार्वजनिक परीक्षाओं की पवित्रता भंग करने की हिम्मत करने वालों को कड़ी से कड़ी सजा देने वाले ठोस प्रावधानों के माध्यम से हमारे युवाओं के सपनों और आकांक्षाओं की रक्षा करता है।

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार हमारे छात्रों के भविष्य को खतरे में डालने की कोशिश करने वाले किसी को भी नहीं बख्शेगी और यह सुनिश्चित करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी कि उन्हें कानून के पूर्ण प्रकोप का सामना करना पड़े।

राहुल गांधी ने मांगा अमित शाह का इस्तीफा

वहीं लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने अब अमित शाह के इस्तीफे की मांग कर दी। इससे पहले पेपर लीक पर चर्चा के दौरान बहस में भाग लेते हुए उन्होंने अमित शाह पर दिल्ली में 20 जुलाई के विरोध प्रदर्शनों के दौरान छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई का आदेश देने का आरोप लगाया था। इन टिप्पणियों पर आपत्ति जताते हुए केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मांग की कि गांधी अपने आरोपों को साबित करें और सदन से माफी मांगें।

सत्ता-पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव

किरेन रिजिजू ने कहा, “आप विपक्ष के नेता हैं। गंभीरता से बोलिए। आपने यह बयान किस आधार पर दिया? वह कैसे कह सकते हैं कि किसी ने गोली चलाने का आदेश दिया? यह उनके अपने पद और विशेषाधिकार का उल्लंघन है।” स्पीकर ओम बिरला ने भी हस्तक्षेप करते हुए राहुल गांधी से तथ्यों पर आधारित बयान देने और सदन की गरिमा बनाए रखने का आग्रह किया। स्पीकर ओम बिरला ने यह भी कहा कि गांधी की कुछ टिप्पणियों को सदन के रिकॉर्ड से हटा दिया जाएगा।

सदन के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए गांधी ने कहा कि केवल दो ही विकल्प” हो सकते हैं, पहला यह कि गृह मंत्री ने आदेश दिए और दूसरा यह कि गृह मंत्री को पता नहीं था कि गोलीबारी होगी। उन्होंने यह भी पूछा कि शाह सदन में क्यों नहीं आ रहे थे। जब सत्ता पक्ष के सदस्यों ने गांधी से माफी मांगने की मांग की, तो विपक्षी सदस्य उनके समर्थन में एकजुट हो गए और कहने लगे, “राहुल जी को बोलने दो”, जिससे सदन में हंगामा बढ़ता चला गया।

राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारियों की तारीफ की

राहुल गांधी ने कहा कि प्रदर्शनकारी छात्रों ने साहस दिखाया है। उन्होंने कहा, “देश के छात्र कह रहे हैं कि हम अंधभक्त नहीं बनेंगे। यह एक सुंदर अभिव्यक्ति है। शायद उनके माता-पिता में भाजपा और आरएसएस का सामना करने का साहस नहीं था। फिर भी ये बच्चे, साहसी, कल्पनाशील और शक्तिशाली, वहां डटे रहे और आपने उन पर जो भी हमला किया, उसका सामना किया।”

शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने वाले धर्मेंद्र प्रधान पर निशाना साधते हुए गांधी ने कहा, “राजनाथ सिंह जी ने कहा था कि हम यूपीए नहीं हैं और हमारे मंत्री कभी इस्तीफा नहीं देते। वे सही हैं। प्रधान का इस्तीफा दिखावटी है क्योंकि उन्होंने कभी शिक्षा व्यवस्था नहीं चलाई। शिक्षा मंत्रालय आरएसएस द्वारा चलाया जाता है। इसे चलाने वाला व्यक्ति मंत्री के कार्यालय में बैठा ओएसडी है।”

जितेंद्र सिंह ने कही राहुल को जानकारी न होने की बात

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने विधेयक पर बहस का जवाब देते हुए गांधी द्वारा प्रयुक्त असंसदीय भाषा का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, “मुझे आश्चर्य है कि विपक्ष के नेता को बुनियादी संसदीय नियमों की जानकारी नहीं है।” जितेंद्र सिंह ने कहा कि विपक्ष के नेता को शायद यह जानकारी नहीं थी कि गोली चलाने का आदेश मजिस्ट्रेट द्वारा दिया जाता है। उन्होंने कहा, “यह स्पष्ट हो चुका है कि गोली नहीं चलाई गई, आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया। जब गोली ही नहीं चलाई गई, तो आदेश किसने दिया, यह सवाल ही नहीं उठता।”

जितेंद्र सिंह ने कहा कि इन संशोधनों से सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों को रोकने और छात्रों एवं युवाओं के हितों की रक्षा करने के लिए कानूनी ढांचा और मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि सरकार सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। विधेयक के प्रमुख प्रावधानों पर प्रकाश डालते हुए जितेंद्र सिंह ने कहा कि अनुचित साधनों का सहारा लेने वाले व्यक्तियों के लिए सजा को तीन से पांच साल की कैद से बढ़ाकर पांच से दस साल कर दिया गया है, जबकि अधिकतम जुर्माना 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये कर दिया गया है।

विधेयक में संगठित अपराध के लिए सजा को पांच से दस वर्ष के कारावास से बढ़ाकर सात से दस वर्ष कर दिया गया है और अधिकतम जुर्माना 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये कर दिया गया है। जितेंद्र सिंह ने कहा कि विधेयक में सार्वजनिक परीक्षाओं से संबंधित अपराधों के लिए विशेष त्वरित न्यायालयों की स्थापना का प्रावधान है और इसमें आरोप पत्र दाखिल होने की तारीख से दो महीने के भीतर जांच पूरी करने और तीन महीने के भीतर मुकदमे को पूरा करने की परिकल्पना की गई है।

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