केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शुक्रवार, 25 जुलाई को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। यह फैसला NEET पेपर लीक विवाद और सीजेपी के 36 दिन लंबे आंदोलन के बीच आया है।
एक्स पर अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए प्रधान ने लिखा, “मैं देश के युवाओं की आकांक्षाओं, भावनाओं और वैध अपेक्षाओं का गहरा सम्मान करता हूं।” उन्होंने कहा कि उन्होंने यह फैसला देश के युवाओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए लिया है।
सीजेपी के 36 दिन लंबे आंदोलन ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया था। इस आंदोलन में लाखों छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों ने हिस्सा लिया।
NEET पेपर लीक का मामला मई 2026 में सामने आया था, जब केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने बताया कि प्राइवेट ट्यूशन सेंटरों के शिक्षकों और एजेंटों ने परीक्षा पेपर लीक किया था। इस मामले में 13 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया था।
पेपर लीक के बाद सरकार ने नतीजों की घोषणा रद्द कर दी और जून में फिर से परीक्षा कराने का आदेश दिया। इससे लाखों छात्रों को दोबारा तैयारी करनी पड़ी, जिससे उनमें भारी निराशा और गुस्सा फैला।
सीजेपी ने बताया कि NEET पेपर लीक से जुड़े मामलों में 21 छात्रों ने आत्महत्या कर ली। हालांकि, सरकार ने इन मौतों पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
प्रधानमंत्री मोदी ने वीडियो संदेश में कहा कि पेपर लीक “घोर पाप” है और सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया, फिर से परीक्षा कराई और भविष्य में लीक रोकने के लिए सख्त उपाय किए।
विपक्षी दलों ने इस मामले को संसद में भी उठाया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि पिछले एक दशक में 150 से अधिक पेपर लीक हुए हैं और किसी को सजा नहीं हुई।