मीडिया काउंसिल ऑफ जर्नलिस्ट्स
विशेष संवाददाता
New Delhi
नई दिल्ली(25 जुलाई 2026) जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों के साथ हुई हालिया पुलिस कार्रवाई पर मीडिया काउंसिल ऑफ जर्नलिस्ट्स ने गहरी चिंता व्यक्त की है। काउंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय राठी ने मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि प्रदर्शन के दौरान आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग हुआ है, तो तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।
“लोकतंत्र की शक्ति दमन में नहीं, संवाद में है”
संजय राठी ने लोकतांत्रिक मूल्यों पर बल देते हुए कहा “भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जहाँ संविधान प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने और विरोध दर्ज कराने का अधिकार प्रदान करता है। विद्यार्थी देश का भविष्य हैं; उनकी समस्याओं को संवेदनशीलता से सुनना और संवाद के माध्यम से समाधान निकालना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की प्राथमिक जिम्मेदारी है।”
काउंसिल ने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस का दायित्व है, लेकिन इस प्रक्रिया में मानवाधिकारों, संवैधानिक मूल्यों और नागरिक स्वतंत्रताओं का पूरा सम्मान होना चाहिए। यदि किसी भी पक्ष द्वारा कानून का उल्लंघन हुआ है, तो उसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
मीडिया काउंसिल ऑफ जर्नलिस्ट्स ने केंद्र सरकार, दिल्ली प्रशासन और संबंधित उच्च अधिकारियों से कुछ मांगें की हैं जिनमे, पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच कराई जाए, घटना में घायल हुए सभी विद्यार्थियों को तुरंत और समुचित स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई जाए, भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए बल प्रयोग के बजाय संवाद और शांतिपूर्ण समाधान को प्राथमिकता दी जाए।
संजय राठी ने अंत में दोहराया कि लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति दमन में नहीं, बल्कि न्याय और पारदर्शिता में निहित है। विद्यार्थियों की आवाज़ को गंभीरता से सुनना और उनकी जायज़ समस्याओं का संवैधानिक समाधान निकालना ही देश और समाज के हित में होगा।