देहरादून/शिमला, 21 जुलाई। लगातार हो रही बारिश के कारण उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के कई पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा काफी बढ़ गया है। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों, चारधाम यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं तथा पर्यटकों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश के कारण सड़कें कमजोर पड़ रही हैं और कई स्थानों पर चट्टानें गिरने तथा मलबा आने की आशंका बनी हुई है। इसी को देखते हुए जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग और स्थानीय पुलिस को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
दोनों राज्यों में पिछले कुछ दिनों से रुक-रुक कर हो रही बारिश ने सामान्य जनजीवन को प्रभावित किया है। कई स्थानों पर पहाड़ी मार्गों पर छोटे-बड़े भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं, जिसके कारण कुछ सड़कों पर यातायात अस्थायी रूप से बाधित हुआ। राहत की बात यह है कि अधिकांश स्थानों पर प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मशीनों की मदद से सड़कें साफ कर यातायात बहाल करने का प्रयास किया। फिर भी मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भारी वर्षा की संभावना जताई है, जिससे स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
चारधाम यात्रा को देखते हुए प्रशासन विशेष सतर्कता बरत रहा है। यात्रा मार्गों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त कर्मचारी तैनात किए गए हैं। श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि यात्रा शुरू करने से पहले मौसम की जानकारी अवश्य लें और प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें। यदि किसी मार्ग पर यात्रा अस्थायी रूप से रोकी जाती है तो सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए अधिकारियों के निर्देशों का इंतजार करें।
हिमाचल प्रदेश के कई पर्वतीय जिलों में भी प्रशासन ने लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है। पहाड़ों में लगातार वर्षा होने से मिट्टी ढीली हो जाती है, जिससे भूस्खलन का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारी बारिश के दौरान पहाड़ी ढलानों पर वाहन रोकना या लंबे समय तक ठहरना जोखिम भरा हो सकता है। ऐसे क्षेत्रों में यात्रा करते समय विशेष सावधानी बरतना आवश्यक है।
आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी जिलों के अधिकारियों को चौबीसों घंटे सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। नियंत्रण कक्ष सक्रिय कर दिए गए हैं और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू करने के लिए टीमें तैयार रखी गई हैं। जहां आवश्यकता महसूस की गई है, वहां जेसीबी मशीनें, एंबुलेंस और अन्य आवश्यक संसाधनों की भी व्यवस्था की गई है ताकि सड़क बंद होने या किसी दुर्घटना की स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।
स्थानीय प्रशासन ने ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों से भी सतर्क रहने की अपील की है। जिन गांवों के आसपास पहाड़ियां या ढलानें हैं, वहां रहने वाले लोगों को लगातार मौसम पर नजर रखने और किसी भी असामान्य स्थिति की जानकारी तुरंत प्रशासन को देने के लिए कहा गया है। यदि कहीं पहाड़ी से पत्थर गिरने, दरारें पड़ने या जमीन खिसकने के संकेत दिखाई दें तो तत्काल सुरक्षित स्थान पर चले जाने की सलाह दी गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार पर्वतीय क्षेत्रों में पेड़ों की अंधाधुंध कटाई, अनियोजित निर्माण और प्राकृतिक जल निकासी व्यवस्था में बदलाव भी कई स्थानों पर भूस्खलन के खतरे को बढ़ाते हैं। उनका मानना है कि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को कम करने के लिए वैज्ञानिक तरीके से विकास कार्यों की योजना बनाना आवश्यक होगा। साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों की नियमित निगरानी और समय-समय पर भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण भी जरूरी हैं।
पर्यटकों के लिए भी प्रशासन ने महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा के दौरान वाहन की गति नियंत्रित रखने, रात के समय अनावश्यक यात्रा से बचने, नदी-नालों के किनारे न रुकने और खराब मौसम में साहसिक गतिविधियों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है। होटल संचालकों और स्थानीय पर्यटन व्यवसायियों से भी पर्यटकों को मौसम संबंधी सही जानकारी देने और प्रशासनिक निर्देशों का पालन कराने के लिए कहा गया है।
स्वास्थ्य विभाग और आपातकालीन सेवाओं को भी अलर्ट पर रखा गया है। पर्वतीय क्षेत्रों के अस्पतालों में आवश्यक दवाओं और चिकित्सकीय सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। एंबुलेंस सेवाओं को संवेदनशील क्षेत्रों के निकट तैयार रखा गया है ताकि किसी भी दुर्घटना की स्थिति में घायलों को तुरंत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।
प्रशासन का कहना है कि मौसम सामान्य होने तक लोगों को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए। किसी भी प्रकार की अफवाह पर विश्वास करने के बजाय केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें। यदि यात्रा अत्यंत आवश्यक न हो तो खराब मौसम के दौरान उसे कुछ समय के लिए टाल देना ही बेहतर होगा। प्रशासन का उद्देश्य नागरिकों और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, इसलिए सभी से सहयोग और धैर्य बनाए रखने की अपील की गई है। आने वाले दिनों में मौसम की स्थिति के अनुसार आवश्यक कदम उठाए जाएंगे और हालात पर लगातार नजर रखी जाएगी।