नई दिल्ली, 21 जुलाई। देश के उत्तरी और पूर्वी हिस्सों में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। पिछले कुछ दिनों से मौसम में लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है और कई राज्यों में रुक-रुक कर हो रही बारिश ने तापमान में गिरावट दर्ज कराई है। मौसम विभाग के अनुसार अगले 72 घंटों के दौरान उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, बिहार, झारखंड, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और मध्य प्रदेश के कई इलाकों में मध्यम से भारी वर्षा होने की संभावना है। कुछ स्थानों पर गरज-चमक, तेज हवाएं और बिजली गिरने की आशंका भी जताई गई है।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से लगातार नमी मिलने के कारण मानसूनी गतिविधियां मजबूत हुई हैं। इसके प्रभाव से उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में बादल सक्रिय बने हुए हैं। कई क्षेत्रों में लगातार बारिश होने से लोगों को भीषण गर्मी और उमस से राहत मिली है। हालांकि लगातार वर्षा के कारण जलभराव, यातायात बाधित होने और स्थानीय स्तर पर बाढ़ जैसी स्थिति बनने की आशंका भी बढ़ गई है।
उत्तर प्रदेश में राजधानी लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, अयोध्या, बरेली, मेरठ, नोएडा, गाजियाबाद, सहारनपुर, बहराइच और लखीमपुर खीरी सहित कई जिलों में अच्छी बारिश की संभावना व्यक्त की गई है। प्रशासन ने सभी जिलों में नियंत्रण कक्ष सक्रिय रखने के निर्देश दिए हैं। नगर निकायों को नालों की सफाई, जल निकासी और संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी बढ़ाने के लिए कहा गया है ताकि बारिश के दौरान लोगों को कम से कम परेशानी का सामना करना पड़े।
दिल्ली-एनसीआर में भी मौसम सुहावना बना हुआ है। दिनभर बादलों की आवाजाही और बीच-बीच में बारिश होने से तापमान सामान्य से नीचे दर्ज किया गया। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले कुछ दिनों तक राजधानी में बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। इसके चलते कई स्थानों पर जलभराव और ट्रैफिक जाम की समस्या उत्पन्न हो सकती है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि बारिश के दौरान सावधानीपूर्वक वाहन चलाएं और अनावश्यक यात्रा से बचें।
उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार वर्षा के कारण भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। कई पहाड़ी मार्गों पर मलबा आने और सड़कें बाधित होने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने मशीनें और राहत दल पहले से तैनात कर दिए हैं। चारधाम यात्रा मार्गों पर भी विशेष निगरानी रखी जा रही है। यात्रियों को मौसम की ताजा जानकारी लेकर ही यात्रा शुरू करने की सलाह दी गई है।
बिहार और झारखंड में भी कई जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है। नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। बाढ़ संभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने के लिए कहा गया है। राहत एवं बचाव दलों को भी तैयार रखा गया है ताकि आवश्यकता पड़ने पर तुरंत सहायता पहुंचाई जा सके।
राजस्थान के पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों में मानसून की गतिविधियां तेज होने से किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर होने वाली वर्षा खरीफ फसलों के लिए लाभदायक साबित हो सकती है। धान, मक्का, बाजरा, सोयाबीन और दालों की खेती को पर्याप्त नमी मिलने से उत्पादन बढ़ने की संभावना है। हालांकि अत्यधिक बारिश होने पर खेतों में पानी भरने से नुकसान भी हो सकता है। किसानों को खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने और मौसम के पूर्वानुमान पर नजर रखने की सलाह दी गई है।
स्वास्थ्य विभाग ने भी बरसात के मौसम में लोगों को विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। बारिश के बाद जगह-जगह पानी जमा होने से मच्छरों का प्रकोप बढ़ सकता है, जिससे डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। लोगों को साफ पानी पीने, भोजन को ढककर रखने और घरों के आसपास जलभराव न होने देने की सलाह दी गई है। चिकित्सकों का कहना है कि तेज बुखार, उल्टी, दस्त या कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
यातायात विभाग ने वाहन चालकों को बारिश के दौरान अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी है। फिसलन भरी सड़कों पर तेज गति से वाहन चलाने से दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है। लोगों से जलभराव वाले रास्तों से बचने, सुरक्षित दूरी बनाए रखने और आवश्यकता होने पर ही यात्रा करने की अपील की गई है। बिजली गिरने की संभावना वाले क्षेत्रों में खुले मैदानों और ऊंचे पेड़ों के नीचे खड़े न होने की भी सलाह दी गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून का यह सक्रिय दौर आने वाले कुछ दिनों तक जारी रह सकता है। यदि वर्षा संतुलित रहती है तो जलाशयों का जलस्तर बढ़ेगा, भूजल स्तर में सुधार होगा और कृषि क्षेत्र को भी इसका लाभ मिलेगा। वहीं अत्यधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में प्रशासन के लिए चुनौती भी बढ़ सकती है। इसलिए सभी संबंधित विभागों को अलर्ट मोड पर रखा गया है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे मौसम से जुड़ी आधिकारिक चेतावनियों पर ध्यान दें, अफवाहों से बचें और किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन या आपदा प्रबंधन विभाग से तुरंत संपर्क करें। लगातार बदलते मौसम को देखते हुए अगले कुछ दिन सावधानी, सतर्कता और जागरूकता के साथ बिताना सभी के लिए आवश्यक माना जा रहा है।