मुंबई में शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता हर्षल प्रधान की किताबों के लोकार्पण कार्यक्रम में शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) प्रमुख राज ठाकरे एक साथ नजर आए। इस दौरान दोनों नेताओं ने युवाओं, लोकतंत्र, हिंदुत्व, बेरोजगारी और केंद्र सरकार से जुड़े कई मुद्दों पर अपनी बात रखी।
उद्धव ठाकरे ने छात्र प्रदर्शनकारियों को लेकर इस्तेमाल की गई आपत्तिजनक भाषा की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि जिन युवाओं को “कॉकरोच” कहा गया, वे सिर्फ 16-17 साल के छात्र हैं। उन्होंने इतिहास का उदाहरण देते हुए कहा कि मुगलों ने भी छत्रपति शिवाजी महाराज को “चूहा” कहा था, लेकिन इससे उनके सम्मान और संघर्ष पर कोई असर नहीं पड़ा। उनके अनुसार, आज के युवाओं के लिए इस तरह की भाषा का इस्तेमाल लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
‘अधिकार और न्याय की मांग करने वाले को आतंकवादी या देशविरोधी कहा जा रहा’
उन्होंने कहा कि आज अगर कोई व्यक्ति अपने अधिकार और न्याय की मांग करता है, तो उसे तुरंत आतंकवादी या देशविरोधी कह दिया जाता है। उन्होंने उस छात्रा का भी जिक्र किया, जिसने पुलिस की गाड़ी रोकी थी। ठाकरे ने कहा कि उस लड़की को सोशल मीडिया पर कट्टरपंथी लोग लगातार ट्रोल कर रहे हैं।
उद्धव ठाकरे ने प्रस्तावित संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 के तहत सांसदों की संख्या बढ़ाने के प्रस्ताव पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि संसद में सीटें बढ़ाने से ज्यादा जरूरी युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि यदि रोजगार मिलेगा तो यही युवा देश का नेतृत्व करेंगे और लोगों का विश्वास भी जीतेंगे।
अपने भाषण में उद्धव ठाकरे ने बालासाहेब ठाकरे का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यदि आज बालासाहेब ठाकरे जीवित होते, तो मौजूदा माहौल में उन्हें भी “हिंदू-विरोधी” कहा जाता। उन्होंने बताया कि बालासाहेब ठाकरे हमेशा कहते थे कि “मानवता ही सबसे बड़ा धर्म है।” उद्धव ने यह भी कहा कि ठाकरे परिवार पर किताब लिखना और उसे प्रकाशित करना साहस का काम है।
धर्म की राजनीति पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग सत्ता हासिल करने के लिए भगवान राम के नाम का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें यह भी सोचना चाहिए कि क्या राम के मंदिर से जुड़ी कथित अनियमितताओं पर उन्हें शर्म नहीं आती।
कार्यक्रम में राज ठाकरे ने भी कई मुद्दों पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी ने दिखा दिया है कि लोकतंत्र कमजोर हो रहा है। उनके अनुसार, यदि कोई अपने हक के लिए आवाज उठाता है, तो उसे गलत तरीके से बदनाम किया जाता है।
राज ठाकरे ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के 200 साल तक बिना गड्ढों वाली सड़कें बनने वाले बयान पर तंज कसते हुए कहा कि दूसरी ओर कुछ पुल 15 दिन में ही गिर जाते हैं। उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पेपर लीक संबंधी बयान पर भी सवाल उठाए। इसके अलावा, सांसदों की संख्या बढ़ाने के प्रस्ताव पर उन्होंने कहा कि जब मौजूदा करीब 550 सांसदों के साथ ही प्रभावी संवाद मुश्किल है, तो 850 सांसद होने पर यह और कठिन हो जाएगा।