भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने जुलाई 2026 के लिए देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश का अनुमान जताया है, जिससे खेती, जल संसाधनों और जलाशयों के स्तर को लेकर चिंता बढ़ गई है। IMD के अनुसार इस महीने देशभर में औसत बारिश लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) के 94 प्रतिशत से भी कम रह सकती है। 1971-2020 के आंकड़ों के अनुसार जुलाई में देशभर में सामान्य बारिश 280.4 मिमी मानी जाती है।
सबसे कम बारिश का असर मध्य, पश्चिमी और दक्षिणी भारत के अधिकांश इलाकों में देखने को मिल सकता है। हालांकि उत्तर-पश्चिम भारत, पूर्वोत्तर भारत, पूर्वी-मध्य भारत और पूर्वी प्रायद्वीपीय भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य या सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना है।
तापमान के बारे में IMD का कहना है कि ज्यादातर इलाकों में अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य से ऊपर रहने की आशंका है, जिससे उमस, गर्मी का तनाव और बिजली की मांग पर दबाव बढ़ सकता है। सामान्य से कम बारिश का असर खेती, जलाशयों के जलस्तर, पेयजल उपलब्धता और पनबिजली उत्पादन पर पड़ सकता है। कई राज्यों में जल संकट और सूखे जैसी परिस्थितियां बनने का जोखिम बढ़ सकता है।
IMD ने किसानों को सलाह दी है कि वे जल संरक्षण और मौसम आधारित खेती के उपाय अपनाएं। प्रशासन को भी समय रहते सिंचाई प्रबंधन और कृषि संबंधी वैकल्पिक योजनाओं पर काम करने की जरूरत बताई गई है। IMD जुलाई के अंत में अगस्त और सितंबर के लिए अलग पूर्वानुमान जारी करेगा।