खनन क्षेत्र के दिग्गज कारोबारी अनिल अग्रवाल भारत में अपना अब तक का सबसे बड़ा निवेश दांव खेलने की तैयारी में हैं। वेदांता लिमिटेड को पांच अलग-अलग सूचीबद्ध कंपनियों में बांटने के बाद, वे अगले तीन से पांच सालों में करीब 20 अरब डॉलर (करीब 1.67 लाख करोड़ रुपये) का निवेश करने की योजना बना रहे हैं। इस निवेश का बड़ा हिस्सा कंपनी की अपनी कमाई से आएगा।
डिमर्जर के बाद वेदांता समूह की पांच सूचीबद्ध कंपनियां हो गई हैं – वेदांता लिमिटेड, वेदांता एल्युमिनियम, वेदांता आयरन एंड स्टील, वेदांता ऑयल एंड गैस और वेदांता पावर। अनिल अग्रवाल का कहना है कि इनमें से हर कंपनी में 100 अरब डॉलर का राजस्व हासिल करने की क्षमता है।
अग्रवाल ने कहा कि भारत में बड़े अवसर मौजूद हैं और इन कंपनियों को आगे बढ़कर बहुत कुछ करना होगा। उन्होंने शेयरधारकों के हितों पर जोर देते हुए कहा कि पिछले पांच सालों में वेदांता ने 300 प्रतिशत का रिटर्न दिया है।
विश्लेषकों की नजर इस बात पर है कि क्या यह पुनर्गठन शेयरधारकों के लिए वास्तव में फायदेमंद साबित होता है और कंपनी अपनी योजनाओं को कितनी अच्छी तरह अमल में लाती है। यह दांव वैश्विक कमोडिटी बाजार की चाल और भारत की प्राकृतिक संसाधनों की लंबी अवधि की मांग पर भी निर्भर करेगा। वेदांता का ध्यान अब पांच कंपनियों और प्राकृतिक संसाधनों पर है और सबकी नजर इस बात पर होगी कि डिमर्जर के बाद कंपनी कम लागत और बड़े निवेश के दम पर कितना डिलीवर कर पाती है।