रक्षा तैयारियों में मील का पत्थर, स्वदेशी अर्ध-बैलिस्टिक मिसाइल
New Delhi
नई दिल्ली (6 नवंबर 2026) भारत ने अपनी मारक क्षमता और सामरिक सुरक्षा को और सुदृढ़ करते हुए रक्षा क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने 5 नवंबर, 2026 को सुबह लगभग 11:10 बजे ओडिशा तट स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से स्वदेशी अर्ध-बैलिस्टिक मिसाइल ‘प्रलय’ का सफल उड़ान परीक्षण किया।
चांदीपुर के एकीकृत परीक्षण रेंज (ITR) के तैनात रडार और अत्याधुनिक ट्रैकिंग उपकरणों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, इस परीक्षण के दौरान मिशन के सभी निर्धारित तकनीकी एवं परिचालन उद्देश्य पूरी तरह सफल रहे।
आत्मनिर्भर भारत का सशक्त उदाहरण
‘प्रलय’ मिसाइल को हैदराबाद के रिसर्च सेंटर इमारत (RCI) ने डीआरडीओ की अन्य प्रमुख प्रयोगशालाओं के समन्वय से पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से विकसित किया है। इसके विकास एवं उत्पादन साझेदार के रूप में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम ‘भारत डायनामिक्स लिमिटेड’ (BDL) ने इस विशिष्ट प्रणाली का निर्माण किया है।
सेना में तैनाती की ओर कदम

यह परीक्षण उपयोगकर्ता मूल्यांकन (User Evaluation Trials) के तहत आयोजित किया गया था, जिसके दौरान सशस्त्र बलों के शीर्ष अधिकारी, डीआरडीओ के वरिष्ठ वैज्ञानिक और रक्षा उद्योग जगत के प्रतिनिधि उपस्थित थे। परीक्षण की पूर्ण सफलता के साथ ही इस अत्याधुनिक मिसाइल प्रणाली को भारतीय सेना के बेड़े में औपचारिक रूप से शामिल करने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर डीआरडीओ, सशस्त्र बलों और उद्योग जगत के साझेदारों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि अत्याधुनिक तकनीकों से युक्त ‘प्रलय’ मिसाइल उभरते क्षेत्रीय खतरों का सटीक जवाब देने तथा सीमाओं पर सेना की परिचालन तत्परता व तकनीकी क्षमता को अभूतपूर्व मजबूती प्रदान करेगी।
वहीं, रक्षा सचिव, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव तथा डीआरडीओ अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने भी सफल परीक्षण में जुटी समस्त वैज्ञानिक और तकनीकी टीमों की सराहना करते हुए इसे देश की सुरक्षा आत्मनिर्भरता के लिए एक बड़ा कदम बताया।