नार्को-आतंक के खिलाफ भारत की बड़ी जीत

तुर्की से प्रत्यर्पित हुआ कुख्यात ड्रग तस्कर नवप्रीत सिंह

New Delhi नई दिल्ली ( 2 अक्तूबर 2026)मादक पदार्थों की तस्करी और सीमा पार से संचालित संगठित अपराध के खिलाफ भारत को एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय सफलता मिली है। केन्द्रीय जांच और सुरक्षा एजेंसियों ने तुर्की से कुख्यात नार्को-ट्रैफिकिंग सरगना नवप्रीत सिंह को सफलतापूर्वक प्रत्यर्पित कर भारत वापस ला दिया है। भारत पहुंचते ही उसे नशीले पदार्थों की तस्करी और अन्य संगीन अपराधों के तहत जेल भेज दिया गया है। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने इस ऑपरेशन को एक ‘ऐतिहासिक उपलब्धि’ बताते हुए इसमें शामिल सभी एजेंसियों को बधाई दी है।

इस उपलब्धि को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर जानकारी साझा करते हुए गृह मंत्री ने बताया कि नवप्रीत सिंह ‘नवाब विर्क’ की फर्जी पहचान बनाकर तुर्की की नागरिकता हासिल करने में कामयाब हो गया था। नागरिकता बदलने के बावजूद वह लगातार अफगानिस्तान से भारत में हेरोइन और मेथम्फेटामाइन (Methamphetamine) जैसे घातक नशीले पदार्थों की तस्करी का सिंडिकेट चला रहा था। भारतीय एजेंसियों ने कड़ी निगरानी और जांच के जरिए उसकी फर्जी पहचान का पर्दाफाश किया और आखिरकार उसे प्रत्यर्पित कराने में सफलता पाई। श्री शाह ने स्पष्ट किया कि मोदी सरकार दिसंबर 2029 से पहले देश के हर नार्को-कार्टेल को जड़ से समाप्त करने के लिए पूरी तरह कटिबद्ध है।

विदेशों में बैठे भगोड़ों पर शिकंजा

मोदी सरकार ने विदेशों में शरण लिए बैठे आर्थिक, आपराधिक और आतंकी भगोड़ों को वापस लाने के लिए एक विशेष और समन्वित अभियान शुरू किया है। आंकड़ों के मुताबिक, 2019 से अगस्त 2026 के बीच 36 अलग-अलग देशों से कुल 288 भगोड़ों को भारत वापस लाया जा चुका है।

गृह मंत्री के अनुसार, पूर्ववर्ती सरकारों में भगोड़ों को वापस लाने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति का अभाव था, लेकिन वर्तमान सरकार ने इसे ‘राष्ट्रीय प्राथमिकता’ घोषित किया। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विजन के अनुरूप इस अभियान को तीन मजबूत स्तंभों पर खड़ा किया गया है  वैश्विक अभियान, मजबूत समन्वय और स्मार्ट कूटनीति। सरकार का स्पष्ट मानना है कि भगोड़े अपराधियों का मुद्दा देश की संप्रभुता, आर्थिक स्थिरता, कानून-व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है।

कानूनी सुधार और ‘मिशन मोड’ में कार्रवाई

वर्ष 2019 में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) संशोधन अधिनियम और गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) संशोधन कानून पारित होने के बाद भगोड़ों के खिलाफ कार्रवाई का दायरा अभूतपूर्व रूप से विस्तृत हुआ। वर्ष 2020 के बाद इस प्रक्रिया को ‘मिशन मोड’ में आगे बढ़ाया गया, जिससे कार्रवाई केवल आपराधिक या आतंकी संगठनों तक सीमित न रहकर व्यक्तिगत आतंकियों, हैंडलर्स, टेरर-फंडिंग नेटवर्क और विदेशों में स्थापित उनके लॉजिस्टिक सपोर्ट सिस्टम तक पहुंच सकी।

‘भारतपोल’ से बदला परिदृश्य

वैश्विक और घरेलू जांच एजेंसियों के बीच वास्तविक समय में समन्वय स्थापित करने के लिए जनवरी 2025 में गृह मंत्री द्वारा शुरू किया गया ‘BHARTPOL’ (भारतपोल) इस सफलता में गेम-चेंजर साबित हुआ है।

भारतपोल ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI), राज्य पुलिस मुख्यालयों और जिला पुलिस तंत्र को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एकीकृत किया है।

वर्तमान में राज्य और केन्द्रीय जांच एजेंसियों के 1,400 से अधिक यूनिट ऑफिस इस पोर्टल से जुड़कर निर्बाध सूचना साझा कर रहे हैं।

इस तकनीक के चलते सूचनाओं के आदान-प्रदान के रिस्पॉन्स टाइम में भारी गिरावट आई है। पूर्व में महीनों तक खिंचने वाली प्रक्रियाएं अब औसतन 10 से 20 दिनों में और कई संवेदनशील मामलों में मात्र 3 से 10 दिनों के भीतर पूरी की जा रही हैं।

नवप्रीत सिंह का प्रत्यर्पण यह संदेश देता है कि अंतरराष्ट्रीय सीमाएं या विदेशी नागरिकता का आवरण अब भारत विरोधी तत्वों और नार्को-सिंडिकेट को कानून के शिकंजे से नहीं बचा सकता।

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