देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों में शामिल आईआईटी बॉम्बे के चार वरिष्ठ वैज्ञानिकों को इस वर्ष प्रतिष्ठित जे.सी. बोस ग्रांट (J.C. Bose Grant) के लिए चुने जाने की सिफारिश की गई है। यह सम्मान उन वैज्ञानिकों को दिया जाता है जिन्होंने लंबे समय तक विज्ञान और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया हो और जो आज भी अत्याधुनिक शोध कार्यों का नेतृत्व कर रहे हों। इस उपलब्धि के बाद संस्थान ने प्रो.एम.रविकांत, प्रो.दीपांकर चौधरी, प्रो.रुचि आनंद और प्रो.देबब्रत मैती को बधाई दी है।
यह चारों वैज्ञानिक अलग-अलग क्षेत्रों में ऐसे शोध कर रहे हैं, जिनका असर सीधे समाज और उद्योग पर पड़ता है। इनमें भूकंपरोधी इंफ्रास्ट्रक्चर, एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस, नई दवाओं के विकास और आधुनिक रसायन विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं।
किन शोधों के लिए मिली पहचान?
प्रो. एम. रविकांत रसायन विज्ञान विभाग से जुड़े हैं और पोर्फिरिन तथा मैक्रोसाइक्लिक अणुओं पर उनके शोध को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। उनका काम केमिकल सेंसिंग, फोटोकेमिस्ट्री और एडवांस्ड मैटेरियल्स के विकास में उपयोगी माना जाता है।
प्रो. दीपांकर चौधरी सिविल इंजीनियरिंग विभाग के विशेषज्ञ हैं। उनका शोध भूकंप के दौरान मिट्टी के व्यवहार, मजबूत नींव के निर्माण और सुरक्षित इमारतों के डिजाइन पर केंद्रित है। उन्होंने भारत के इंजीनियरिंग कोड IS: 19117 के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
प्रो. रुचि आनंद, जो रसायन विज्ञान विभाग की प्रमुख हैं, एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस, स्ट्रक्चरल बायोकेमिस्ट्री और बायोसेंसर पर काम करती हैं। उनका शोध यह समझने में मदद करता है कि बैक्टीरिया दवाओं के खिलाफ प्रतिरोध कैसे विकसित करते हैं, जिससे भविष्य में बेहतर इलाज विकसित करने का रास्ता खुलता है।
प्रो. देबब्रत मैती सिंथेटिक ऑर्गेनिक केमिस्ट्री के क्षेत्र के प्रमुख वैज्ञानिकों में गिने जाते हैं। C-H बॉन्ड एक्टिवेशन पर उनका शोध नई दवाओं के निर्माण को अधिक प्रभावी और तेज बनाने में अहम योगदान दे रहा है।
क्या है जे.सी. बोस ग्रांट?
अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) की ओर से दिया जाने वाला J.C. Bose Grant देश के सबसे प्रतिष्ठित वैज्ञानिक सम्मानों में शामिल है। यह 45 से 65 वर्ष आयु के उन वैज्ञानिकों को दिया जाता है जिन्होंने अपने क्षेत्र में लगातार उत्कृष्ट शोध किया हो और आगे भी शोध व नवाचार को दिशा दे रहे हों।
इस ग्रांट के तहत चयनित वैज्ञानिकों को पांच वर्षों तक हर साल 25 लाख रुपये का शोध अनुदान दिया जाता है। साथ ही उनके संस्थान को भी रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने के लिए अतिरिक्त सहायता मिलती है।
एक ही वर्ष में IIT बॉम्बे के चार वैज्ञानिकों का इस सम्मान के लिए चुना जाना संस्थान की मजबूत शोध परंपरा और वैश्विक स्तर पर उसकी वैज्ञानिक उपलब्धियों का महत्वपूर्ण प्रमाण माना जा रहा है।