तमिलनाडु में राज्य सरकार के स्वामित्व वाली शराब बिक्री कंपनी तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन (TASMAC) से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले की जांच तेज हो गई है। राज्य की भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी डायरेक्टरेट ऑफ विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन (DVAC) ने पूर्व आबकारी मंत्री वी. सेंथिल बालाजी समेत सात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इसके साथ ही एजेंसी ने राज्यभर में 41 स्थानों पर एक साथ छापेमारी कर अहम दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जुटाने की कार्रवाई की।
बुधवार सुबह करीब 7 बजे शुरू हुई इस कार्रवाई के तहत करूर जिले के रामेश्वरपट्टी स्थित सेंथिल बालाजी के आवास, उनके करीबी सहयोगियों और पूर्व सहायकों के घरों के अलावा TASMAC के जिला कार्यालय में भी तलाशी ली गई। इसके साथ ही चेन्नई, कोयंबटूर, तिरुप्पुर, इरोड, नीलगिरि और अन्य जिलों में भी एक साथ छापे मारे गए।
इन लोगों पर दर्ज हुई एफआईआर
DVAC ने मंगलवार रात दर्ज एफआईआर में पूर्व मंत्री वी. सेंथिल बालाजी के अलावा पूर्व TASMAC प्रबंध निदेशक एस. विसाकन (IAS), पूर्व वरिष्ठ क्षेत्रीय प्रबंधक टी. रामादुरई मुरुगन और आर. पन्नीर सेल्वम, पूर्व मंत्री के सहयोगी भास्कर तथा दो निजी व्यक्तियों रथेश राज शन्मुगवेल और एस. कार्तिक उर्फ मुलानूर कार्तिक को आरोपी बनाया है। एफआईआर में कुछ अज्ञात सरकारी अधिकारियों, परिवहन कंपनियों, बॉटलिंग कंपनियों और डिस्टिलरी का भी उल्लेख किया गया है।
2021 से 2025 तक फैले कथित भ्रष्टाचार का आरोप
एफआईआर के अनुसार जांच एजेंसी का दावा है कि वर्ष 2021 से 2025 के बीच TASMAC के भीतर एक संगठित नेटवर्क सक्रिय था, जिसने शराब खरीद, परिवहन ठेके, बार लाइसेंस और प्रशासनिक फैसलों में बड़े स्तर पर अनियमितताएं कीं। जांच एजेंसी का आरोप है कि इस नेटवर्क ने सरकारी प्रक्रियाओं को प्रभावित कर कुछ चुनिंदा निजी कंपनियों और व्यक्तियों को अनुचित लाभ पहुंचाया।
टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप
जांच में आरोप लगाया गया है कि TASMAC बार और परिवहन ठेकों के लिए निकाले गए टेंडरों में हेरफेर किया गया। अधिकारियों ने कथित तौर पर कुछ खास बोलीदाताओं को फायदा पहुंचाया, आवेदकों के बीच कार्टेल बनवाए और लाइसेंस समाप्त होने के बाद भी कई बारों को संचालन की अनुमति दी। इससे राज्य सरकार को भारी आर्थिक नुकसान होने का दावा किया गया है।
एफआईआर में कोयंबटूर, तिरुप्पुर, इरोड, नमक्कल, नीलगिरि और करूर जिलों में बार टेंडरों में अनियमितताओं का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। आरोप है कि जहां नए टेंडर जारी होने चाहिए थे, वहां अधिकारियों ने बार संचालकों के साथ मिलीभगत कर पुरानी व्यवस्था जारी रखी।
परिवहन ठेकों में भी कथित धांधली
जांच एजेंसी ने TASMAC के 45 डिपो के परिवहन ठेकों में भी अनियमितताओं का आरोप लगाया है। एफआईआर के अनुसार, एक आवेदक द्वारा जमा किए गए अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट (EMD) के डिमांड ड्राफ्ट का कथित रूप से दुरुपयोग किया गया और उन्हें अन्य परिवहन ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किया गया। एजेंसी का कहना है कि पूरी प्रक्रिया में धोखाधड़ी, हेरफेर और अवैध वित्तीय लेनदेन शामिल थे।
बार लाइसेंस पर सिंडिकेट का नियंत्रण
जांच में TASMAC बारों के संचालन को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। एफआईआर के मुताबिक, कई मामलों में बार लाइसेंस सफल बोलीदाताओं के बजाय तीसरे पक्ष के सिंडिकेट के नियंत्रण में थे। इसमें तथाकथित ‘करूर गैंग’ का भी जिक्र किया गया है, जिस पर राज्यभर में बार आवंटन को प्रभावित करने और TASMAC अधिकारियों पर दबाव बनाने का आरोप है।
शराब कंपनियों पर भी आरोप
एफआईआर में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा पहले जुटाई गई कुछ जानकारियों को भी शामिल किया गया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि कुछ डिस्टिलरी और बोतल आपूर्ति करने वाली कंपनियों ने फर्जी या बढ़े हुए बिलों के जरिए बेहिसाब नकदी तैयार की। बाद में यही पैसा कथित रूप से शराब आपूर्ति के ठेके हासिल करने के लिए रिश्वत के रूप में इस्तेमाल किया गया।
पावर ब्रोकर की भूमिका की भी जांच
एफआईआर में रथेश राज शन्मुगवेल को एक ‘अनधिकृत पावर ब्रोकर’ बताया गया है। आरोप है कि उन्होंने शराब ब्रांड की मंजूरी, बार लाइसेंस टेंडर और अधिकारियों के तबादलों जैसे फैसलों को प्रभावित किया। जांच एजेंसी का दावा है कि उस समय के TASMAC प्रबंध निदेशक भी उनके माध्यम से दिए गए निर्देशों पर कार्रवाई करते थे। हालांकि, ये सभी आरोप फिलहाल जांच के दायरे में हैं और इनकी पुष्टि अदालत में होना बाकी है।
भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत मामला दर्ज
DVAC का कहना है कि प्रारंभिक जांच में आपराधिक साजिश, सरकारी पद का दुरुपयोग, धोखाधड़ी, विश्वासघात और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के उल्लंघन के प्रथम दृष्टया साक्ष्य मिले हैं। इसी आधार पर भारतीय दंड संहिता (IPC), भारतीय न्याय संहिता (BNS) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। फिलहाल जांच जारी है और एजेंसी आगे और दस्तावेजों व डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है।
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