ग़ाज़ियाबाद के स्थानीय नेता जुनैद मलिक ने जंतर-मंतर पर खाने के अपने पिछले आरोपों से पल्टते हुए कहा है कि यह सब गलतफहमी थी। उन्होंने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि उनका इरादा किसी को बदनाम करने का नहीं था।
जुनैद मलिक ने पिछले महीने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान दावा किया था कि वहां मिलने वाला खाना घटिया क्वालिटी का है। उन्होंने कहा था कि प्रदर्शनकारियों को ठीक से खाना नहीं मिल रहा है।
हालांकि अब जुनैद मलिक ने अपने बयान से पल्टते हुए कहा है कि उस समय उन्हें पूरी जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि यह गलतफहमी थी और वे इसके लिए खेद व्यक्त करते हैं।
जुनैद मलिक ने कहा कि उन्होंने बाद में पता लगाया कि खाने की व्यवस्था ठीक थी और कई प्रदर्शनकारी संतुष्ट थे। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य केवल प्रदर्शनकारियों की समस्याओं को उठाना था।
जुनैद मलिक ग़ाज़ियाबाद के एक जाने-माने स्थानीय नेता हैं। वे कई बार स्थानीय मुद्दों पर मुखर रहे हैं। उनके इस बयान से राजनीतिक गलियारे में चर्चा का दौर शुरू हो गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जुनैद मलिक का यह पलटवार राजनीतिक गणित से जुड़ा हो सकता है। उन्होंने कहा कि नेताओं के बयान अक्सर बदलते रहते हैं।
जुनैद मलिक ने मीडिया से अनुरोध किया है कि वे इस मुद्दे को अब और तूल न दें। उन्होंने कहा कि वे जनता के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं।
ग़ाज़ियाबाद की राजनीति में जुनैद मलिक का यह बयान काफी चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों का मानना है कि नेताओं को ऐसे बयान देने से पहले तथ्यों की जांच कर लेनी चाहिए।