खाड़ी क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट रूप से घोषणा की है कि ईरान के साथ पहले हुआ सीजफायर अब खत्म हो चुका है। इस बीच कतर मध्यस्थता की भूमिका निभा रहा है और दोनों पक्षों के बीच कूटनीतिक प्रयास जारी हैं। ट्रंप प्रशासन की मुख्य शर्त यह है कि ईरान को अपने यूरेनियम भंडार को अंतरराष्ट्रीय निगरानी में सौंपना होगा और अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह पारदर्शी बनाना होगा।
ईरान वर्तमान में 60% तक यूरेनियम संवर्धन कर रहा है, जो हथियार-ग्रेड स्तर (90%) के करीब है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने हाल ही में रिपोर्ट दी है कि ईरान के पास पर्याप्त मात्रा में संवर्धित यूरेनियम मौजूद है। अमेरिका का कहना है कि ईरान को तुरंत परमाणु वार्ता में लौटना चाहिए, अन्यथा उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
विश्लेषकों के अनुसार इस टकराव का सीधा असर वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ रहा है। ब्रेंट क्रूड पहले ही 85 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुका है। अगर तनाव और बढ़ता है तो तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं, जिसका सीधा असर भारत जैसे तेल आयातक देशों पर पड़ेगा। भारत सरकार ने स्थिति पर कड़ी नज़र रखने के निर्देश दिए हैं और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार को मजबूत करने के प्रयास तेज कर दिए हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि भारत क्षेत्रीय स्थिरता का समर्थन करता है और वह चाहता है कि दोनों पक्ष बातचीत के ज़रिए अपने मतभेदों का हल निकालें।