पहले वनडे में पांच विकेट गिरने के बाद जो रूट और लियाम डॉसन ने संयम और सूझबूझ के साथ खेलते हुए इंग्लैंड को मुश्किल से उबारा। दोनों ने छठे विकेट के लिए 87 रनों की महत्वपूर्ण साझेदारी की और इंग्लैंड को 150 के पार पहुंचाया। रूट ने तकनीकी दक्षता और परिपक्वता का परिचय देते हुए संतुलित पारी खेली और 62 रन बनाए। उन्होंने क्रीज पर समय बिताया और एजबेस्टन की पिच पर भारतीय गेंदबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया।
डॉसन ने भी रूट का अच्छा साथ निभाया और 45 रनों की उपयोगी पारी खेली। डॉसन ने अपनी पारी में तीन चौके और एक छक्का लगाया। दोनों ने मिलकर इंग्लैंड को एक सम्मानजनक स्थिति में पहुंचाया। हालांकि, दोनों के आउट होने के बाद इंग्लैंड की पारी जल्दी सिमट गई। डॉसन को बुमराह ने LBW आउट किया, जबकि रूट शमी की गेंद पर कॉट आउट हुए।
विशेषज्ञों के अनुसार, रूट की यह पारी उनके अनुभव और तकनीक का प्रमाण है। उन्होंने साबित किया कि वनडे क्रिकेट में धैर्य और अनुशासन कितने महत्वपूर्ण हैं। रूट का वनडे करियर शानदार रहा है और वह इंग्लैंड के सबसे सफल बल्लेबाजों में से एक हैं। डॉसन ने भी अपनी उपयोगिता साबित की और दिखाया कि वह गेंदबाजी के साथ-साथ बल्लेबाजी में भी टीम में योगदान कर सकते हैं। इस साझेदारी ने इंग्लैंड को मैच में वापस लाने का काम किया, हालांकि वे जीत के लिए आवश्यक स्कोर तक नहीं पहुंच सके।