केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सरकार की एथेनॉल ब्लेंडिंग नीति पर सफाई देते हुए कहा है कि जो वाहन चालक शुद्ध पेट्रोल चाहते हैं, वे अधिक कीमत चुकाकर ले सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना और किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर प्रदान करना है। गडकरी ने कहा कि एथेनॉल मिश्रण से न केवल प्रदूषण कम होगा बल्कि देश के विदेशी मुद्रा भंडार की भी बचत होगी।
उन्होंने यह भी बताया कि भारत पहले ही 20% एथेनॉल मिश्रण के लक्ष्य को प्राप्त कर चुका है और अब 2030 तक 30% मिश्रण का लक्ष्य रखा गया है। गडकरी के अनुसार इस नीति के तहत गन्ना किसानों को अपनी फसल का उचित मूल्य मिल रहा है और चीनी मिलों को भी अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हो रहा है। हालांकि ऑटोमोबाइल कंपनियों ने इस नीति पर कुछ चिंताएं जताई हैं, लेकिन गडकरी का कहना है कि सभी आधुनिक वाहन एथेनॉल मिश्रित ईंधन के साथ पूरी तरह अनुकूल हैं।
एथेनॉल नीति के विरोधियों का तर्क है कि इससे खाद्य फसलों के उत्पादन पर दबाव पड़ सकता है और पानी की खपत बढ़ सकती है। लेकिन सरकार का कहना है कि वह गैर-खाद्य स्रोतों जैसे कि कृषि अपशिष्ट से एथेनॉल उत्पादन को भी बढ़ावा दे रही है। इस दिशा में कई संयंत्र स्थापित किए गए हैं। गडकरी ने कहा कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता देश है और एथेनॉल मिश्रण से देश को प्रति वर्ष लगभग 1 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिलेगी।