विदेशी निवेशक जिन्होंने सिर्फ भारतीय कंपनियों के शेयर खरीदे हैं लेकिन उन पर कोई डिविडेंड, ब्याज या कैपिटल गेन नहीं कमाया, उन्हें भी इनकम टैक्स विभाग की ओर से रीअसेसमेंट नोटिस भेजे जा रहे हैं। हाल के हफ्तों में कई ऑफशोर निवेशकों – कंपनियों, इन्वेस्टमेंट व्हीकल्स, फंड हाउसों और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को आयकर अधिनियम की धारा 148 के तहत नोटिस मिले हैं।
टैक्स विशेषज्ञों के अनुसार ये नोटिस खरीद लेनदेन से संबंधित हैं, न कि बिक्री से। त्रिलीगल लॉ फर्म की पार्टनर आदिति गोयल ने कहा, ‘हैरानी की बात यह है कि कई नोटिस खरीद लेनदेन से जुड़े हैं, न कि एग्जिट से। यहां एक अनिवासी ने सिर्फ भारतीय शेयर खरीदे हैं और उससे कोई आय अर्जित नहीं की है। यह शायद रेमिटेंस दस्तावेजों की जानकारी और इन निवेशकों द्वारा आईटीआर न भरने के कारण ट्रिगर हुआ है।’
इन नोटिसों का मतलब यह नहीं है कि टैक्स देना ही होगा, लेकिन इनका जवाब जरूरी दस्तावेजों के साथ समय पर देना बेहद जरूरी है। खैतान एंड कंपनी के पार्टनर आशीष मेहता ने कहा, ‘रीअसेसमेंट नोटिस व्यापक जांच का द्वार खोलता है। एक बार शुरू होने के बाद विभाग न केवल उन मुद्दों की जांच कर सकता है जिनके कारण रीओपनिंग हुई, बल्कि अन्य लेनदेन की भी जांच कर सकता है।’
विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ विदेशी निवेशक महत्वपूर्ण शेयरधारकों और निदेशकों की जानकारी छुपाने के लिए रिटर्न नहीं भरते हैं। करुंदिया एंड कंपनी के चार्टर्ड अकाउंटेंट आशीष करुंदिया ने कहा कि कभी-कभी ये नोटिस वास्तविक आय छुपाने के लिए डिजाइन किए गए हैं, लेकिन फॉर्म 15सीए/सीबी डेटा के कारण लेनदेन वर्ष पर विचार किए बिना ट्रिगर हो सकते हैं। यह स्थिति विदेशी निवेशकों के बीच चिंता पैदा कर रही है।