गुजरात सरकार ने ‘विकसित गुजरात डेटा सेंटर पॉलिसी 2026-2029’ लॉन्च की है, जिसका मकसद राज्य को हाइपरस्केल डेटा सेंटर, क्लाउड कंप्यूटिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए भारत का पसंदीदा गंतव्य बनाना है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने गांधीनगर में इस नीति का शुभारंभ किया।
इस नीति के तहत राज्य में 6 लाख करोड़ रुपये के निवेश और 7.5 गीगावॉट डेटा सेंटर क्षमता सृजन का लक्ष्य रखा गया है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री अर्जुन मोढ़वाडिया ने बताया कि राज्य को पहले ही 10 गीगावॉट क्षमता के डेटा सेंटर प्रस्ताव मिल चुके हैं।
नीति के तहत कई वित्तीय और गैर-वित्तीय प्रोत्साहन दिए जाएंगे। इनमें ढोलेरा क्षेत्र में पात्र निवेश पर 2.5 प्रतिशत पूंजी सब्सिडी, 10 साल के लिए 4 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी (सालाना 25 करोड़ रुपये की सीमा के साथ), 20 साल के लिए 1 रुपये प्रति यूनिट बिजली टैरिफ सब्सिडी, स्टाम्प ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क में पूर्ण छूट और 20 साल के लिए बिजली शुल्क की प्रतिपूर्ति शामिल है।
डिप्टी सीएम हर्ष संघवी ने कहा कि ढोलेरा में डेटा सेंटर क्षमता की मांग नीति में परिकल्पित क्षमता से दोगुनी से अधिक है। उन्होंने कहा कि ढोलेरा में दुनिया का सबसे बड़ा डेटा सेंटर सिटी बनने की क्षमता है। नीति में स्थिरता पर भी जोर दिया गया है – डेटा सेंटर को कम से कम 51 प्रतिशत बिजली हरित ऊर्जा स्रोतों से लेनी होगी और पानी की जरूरतें डीसेलिनेशन प्लांट से पूरी की जाएंगी। यह पहल गुजरात के 2047 तक 3.5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के बड़े लक्ष्य का हिस्सा है।