गंगटोक, 21 जुलाई। सिक्किम में निर्माणाधीन सुरंग में हुए हादसे के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। घटना के बाद प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग, सेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और राज्य की विभिन्न एजेंसियों ने संयुक्त रूप से मोर्चा संभाल लिया है। बचाव दलों का मुख्य उद्देश्य सुरंग के भीतर मौजूद सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना और किसी भी संभावित खतरे को जल्द से जल्द नियंत्रित करना है। पूरे क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया है तथा अनधिकृत लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार सुरंग के भीतर अचानक तकनीकी समस्या उत्पन्न होने के बाद कार्य प्रभावित हुआ। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन सक्रिय हो गया और कुछ ही समय में राहत एवं बचाव दल मौके पर पहुंच गए। सुरंग के भीतर ऑक्सीजन की उपलब्धता, गैस के स्तर और संरचना की मजबूती की लगातार जांच की जा रही है ताकि बचाव अभियान पूरी सुरक्षा के साथ आगे बढ़ाया जा सके।
राहत कार्य में आधुनिक उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है। सुरंग के भीतर फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए विशेष ड्रिलिंग मशीनें, गैस डिटेक्टर, थर्मल कैमरे और संचार उपकरण लगाए गए हैं। बचाव दल सुरंग के प्रत्येक हिस्से की सावधानीपूर्वक जांच कर रहे हैं ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना की पुनरावृत्ति न हो। इंजीनियरों की टीम भी लगातार संरचना का निरीक्षण कर रही है और सुरक्षित रास्ता तैयार करने में जुटी हुई है।
प्रशासन ने घटनास्थल के आसपास सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत कर दी है। पुलिस बल तथा अन्य सुरक्षा एजेंसियां क्षेत्र में तैनात हैं ताकि राहत कार्य में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो। स्थानीय लोगों से अपील की गई है कि वे घटनास्थल के आसपास भीड़ न लगाएं और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। इससे बचाव दलों को अपना कार्य तेजी और व्यवस्थित तरीके से करने में सहायता मिल रही है।
घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग को भी पूरी तरह अलर्ट पर रखा गया है। आसपास के अस्पतालों में अतिरिक्त चिकित्सकों और चिकित्सा कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। एंबुलेंस सेवाओं को तैयार रखा गया है ताकि जरूरत पड़ने पर घायलों को तुरंत उपचार उपलब्ध कराया जा सके। चिकित्सकों ने बताया कि यदि सुरंग के भीतर लंबे समय तक रहने के कारण किसी व्यक्ति को सांस लेने में कठिनाई, थकान या अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्या होती है तो तत्काल उपचार की व्यवस्था की गई है।
बचाव अभियान में शामिल विशेषज्ञों का कहना है कि सुरंग के भीतर किसी भी प्रकार की जल्दबाजी जोखिम बढ़ा सकती है। इसलिए प्रत्येक कदम पूरी सावधानी और तकनीकी मानकों के अनुसार उठाया जा रहा है। गैस के स्तर, वेंटिलेशन और सुरंग की स्थिरता की नियमित निगरानी की जा रही है। जहां आवश्यकता महसूस हो रही है, वहां अतिरिक्त सहारा देने के लिए अस्थायी संरचनाएं भी तैयार की जा रही हैं।
स्थानीय प्रशासन ने फंसे लोगों के परिजनों के लिए सहायता केंद्र स्थापित किए हैं। यहां उन्हें राहत कार्य की प्रगति की जानकारी दी जा रही है और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि प्रत्येक व्यक्ति की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और सभी एजेंसियां समन्वय के साथ काम कर रही हैं। किसी भी नई जानकारी की आधिकारिक पुष्टि के बाद ही सार्वजनिक रूप से साझा किया जा रहा है ताकि अफवाहों को रोका जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि पर्वतीय क्षेत्रों में सुरंग निर्माण अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। बदलती भूगर्भीय परिस्थितियां, लगातार वर्षा और चट्टानों की संरचना कई बार निर्माण कार्य को प्रभावित कर सकती है। इसलिए ऐसे परियोजनाओं में नियमित तकनीकी निरीक्षण, सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन और आधुनिक निगरानी प्रणाली का उपयोग अत्यंत आवश्यक माना जाता है। उनका कहना है कि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं से बचने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता है।
राज्य सरकार ने संबंधित विभागों को घटना की विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि दुर्घटना किन परिस्थितियों में हुई और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए किन अतिरिक्त उपायों की आवश्यकता है। यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है और सभी संबंधित एजेंसियां समन्वय के साथ कार्य कर रही हैं। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें और किसी भी प्रकार की अपुष्ट जानकारी या अफवाहों को साझा न करें। पूरे अभियान का उद्देश्य प्रत्येक व्यक्ति की सुरक्षित निकासी सुनिश्चित करना और स्थिति को जल्द से जल्द सामान्य बनाना है। आने वाले समय में जांच रिपोर्ट और राहत कार्य की प्रगति के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।