पिछले नौ दिनों से हम यहीं बैठे हैं। हर साल हरेला पर पेड़ लगाते थे, लेकिन इस बार उन्हीं पेड़ों को बचाने के लिए धरना देना पड़ रहा है। विकास के नाम पर सदियों पुराने साल के जंगल काटे जा रहे हैं। आखिर यह कैसा हरेला है? यह कहते हुए प्रदर्शनकारी मनीष रावत सामने खड़े एक विशाल साल के पेड़ की ओर इशारा करते हैं। चेहरे पर नाराजगी है, लेकिन आवाज में बेबसी भी साफ झलकती है। देहरादून-ऋषिकेश मार्ग पर सात मोड़ के जंगल में हरेला के दिन दो तस्वीरें साथ-साथ दिखती हैं। पूरे उत्तराखंड में पौधारोपण का उत्सव मनाया जा रह