New Delhi
नई दिल्ली (31 अगस्त 2026)कुदरत के इस भयंकर तांडव ने नेपाल की वादियों त्राहिमाम मचा दिया है। नेपाल में की इस भीषण जल प्रलय और बाढ़ के थमते ही अब मलबे के ढेर से इंसानी जिंदगियों की दर्दनाक दास्तां बाहर आने लगी है। आपदा प्रभावित क्षेत्रों से शवों के मिलने का सिलसिला लगातार जारी है, जिससे हर आंख नम है और पूरा देश गहरे सदमे में डूबा हुआ है।
हर गुजरते दिन के साथ स्थिति और अधिक दर्दनाक होती जा रही है। जगह-जगह सड़कों पर फैला मीलों तक का मलबा और कीचड़ राहत कार्यों में सबसे बड़ी दीवार बन गया है। रास्तों के बाधित होने के कारण घायलों तक दवाइयां और समय पर चिकित्सा सहायता पहुंचाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती साबित हो रहा है।
इस बीच, सड़कों पर पड़े मलबे, जगह-जगह रुके सड़े पानी और मवेशियों के शवों के कारण अब एक नए और भयंकर संकट ने सिर उठा लिया है महामारी फैलने का गंभीर खतरा। दूषित वातावरण और पेयजल के संकट के बीच स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि युद्धस्तर पर सफाई और राहत अभियान नहीं चलाए गए, तो स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है।
तबाही के इन खंडहरों के बीच अपनों को खोने का गम और भुखमरी व बीमारी का खौफ नेपाल के लोगों के चेहरों पर साफ पढ़ा जा सकता है। शासन-प्रशासन और राहत दल अवरुद्ध रास्तों को साफ कर घायलों तक पहुंचने और इस आपदा के महाविनाश को थामने की जद्दोजहद में जुटे हैं।