दोनों सदनों में रिपब्लिकन पार्टी की करारी हार
New Delhi
नई दिल्ली (4 नवंबर 2026) अमेरिकी मध्यावधि चुनावों (Midterm Elections) के नतीजों ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के राजनीतिक भविष्य पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। भारी जनसमर्थन और आक्रामक प्रचार के बावजूद, ट्रंप समर्थित रिपब्लिकन उम्मीदवारों को अमेरिकी संसद के दोनों सदनों प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) और सीनेट (Senate) में अप्रत्याशित और करारी हार का सामना करना पड़ा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन चुनावों को सीधे तौर पर डोनाल्ड ट्रंप की लोकप्रियता और उनकी नीतियों पर जनमत संग्रह के रूप में देखा जा रहा था। मतदान से ठीक पहले तक कड़े मुकाबले के दावे किए जा रहे थे, लेकिन जनता ने ‘ट्रंप फैक्टर’ को सिरे से खारिज करते हुए विपक्षी खेमे के पक्ष में निर्णायक जनादेश दिया।
इस करारी हार के प्रमुख कारणों में ‘दोनों सदनों पर नियंत्रण गंवाया: रिपब्लिकन पार्टी न केवल सीनेट की अहम सीटों पर पिछड़ गई, बल्कि प्रतिनिधि सभा में भी बहुमत हासिल करने में नाकाम रही।
ट्रंप के पसंदीदा उम्मीदवारों की हार: पेंसिल्वेनिया, एरिजोना और जॉर्जिया जैसे अहम स्विंग स्टेट्स में जिन उम्मीदवारों के लिए ट्रंप ने खुद रैलियां की थीं, उन्हें मतदाताओं ने नकार दिया।
पार्टी में असंतोष: नतीजों के तुरंत बाद रिपब्लिकन खेमे के भीतर ही ट्रंप के नेतृत्व और उम्मीदवार चयन को लेकर खुलकर सवाल उठने लगे हैं।
दोनों सदनों में इस दोहरी हार ने न केवल रिपब्लिकन पार्टी के रणनीतिकारों को सकते में डाल दिया है, बल्कि आगामी राष्ट्रपति चुनाव के लिए ट्रंप की दावेदारी और उनकी राजनीतिक ताकत को भी गहरा आघात पहुंचाया है।