मुख्यमंत्री से मिलकर व्यथा सुनाने का निर्णय
Ghaziabad
गाजियाबाद15 सितंबर 2026) पश्चिम उत्तर प्रदेश में प्रशासन द्वारा कोरी समाज के जाति प्रमाण पत्र न बनाए जाने को लेकर समाज के लोगों में भारी आक्रोश है। इस गंभीर समस्या के समाधान और आगामी रणनीति पर विचार करने के लिए अमर पाल कोरी के नेतृत्व में कोरी समाज की एक अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक में सहारनपुर और मेरठ कमिश्नरी के विभिन्न जिलों से आए समाज के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
छात्रों की पढ़ाई और नौकरियों पर संकट
बैठक में कोरी समाज संघ के अध्यक्ष लेखराज माहौर ने मुख्य मुद्दा उठाते हुए बताया कि वर्ष 1976 में कोरी समाज को अनुसूचित जाति की सूची में आधिकारिक रूप से शामिल किया गया था।
पश्चिम उत्तर प्रदेश में कोरी समाज की आबादी लगभग 25 लाख है, जिन्हें जाति प्रमाण पत्र बनवाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, प्रमाण पत्र न मिलने के कारण विद्यार्थियों को स्कूल-कॉलेजों में छात्रवृत्ति (स्कॉलरशिप) मिलने में परेशानी हो रही है, वहीं युवाओं को नौकरियों के लिए आवेदन करने में भी भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
समाज के प्रतिनिधियों ने शासन-प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि पश्चिम उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में आ रही इन बाधाओं को दूर किया जाए। जाति प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया को सरल बनाने के निर्देश प्रशासन को दिए जाएं ताकि समाज के लोग आसानी से अपने प्रमाण पत्र हासिल कर सकें।
बैठक में यह सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि कोरी समाज का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर इस समस्या को रखेगा और इसके स्थायी समाधान की मांग करेगा।
इस बैठक का संचालन अमर पाल कोरी ने किया। इस दौरान सुरेश कोरी, राजवीर सिंह, रामनिवास आर्य, डॉ. नाहर सिंह, गौतम बुद्ध नगर के जिला महामंत्री धर्मेंद्र कोरी, प्रकाश चंद कोरी, रविंदर आर्य, कपिल आर्य, दिनेश कोरी, दुष्यंत कोरी, रविंदर कोरी (एडवोकेट), धर्मवीर कोरी (प्रधान), मुकेश कोरी, संत कुमार प्रधान, मनीष प्रधान, संजय कोरी, कृष्ण पाल कोरी, मास्टर कपिल कोरी और डॉ. नरेंद्र कोरी सहित बड़ी संख्या में समाज के गणमान्य लोग मौजूद रहे।