देश में खरीफ सीजन की बुवाई में पिछले वर्ष की तुलना में 16% की गिरावट दर्ज की गई है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, धान, दलहन और मोटे अनाज के रकबे में कमी आई है। हालांकि, गन्ने के रकबे में वृद्धि हुई है, जिसका श्रेय सरकार की इथेनॉल ब्लेंडिंग नीति को दिया जा रहा है। किसान गन्ने की ओर रुख कर रहे हैं क्योंकि इथेनॉल की मांग बढ़ने से उन्हें अच्छा मूल्य मिल रहा है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, अनियमित मानसून और कुछ क्षेत्रों में सूखे के कारण बुवाई प्रभावित हुई है। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक में धान की बुवाई में कमी आई है जबकि पंजाब और हरियाणा में स्थिति सामान्य है। दलहन और तिलहन की बुवाई भी पिछले वर्ष के स्तर से कम है। गन्ने के रकबे में लगभग 8% की वृद्धि हुई है, जो इथेनॉल उत्पादन के लिए फायदेमंद होगा। सरकार ने किसानों को समय पर बुवाई करने और फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने की सलाह दी है। खाद्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरकार कम बुवाई वाले क्षेत्रों में किसानों को सहायता प्रदान करने पर विचार कर रही है। इथेनॉल नीति के कारण गन्ना किसानों को लाभ हो रहा है, लेकिन खाद्य फसलों के रकबे में कमी चिंता का विषय है।