सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की त्रिभाषा नीति को लेकर अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने कहा कि “भाषा सीखना कभी बेकार नहीं जाता” और अगले हफ्ते इस मामले की विस्तृत सुनवाई करने पर सहमति जताई। अदालत ने केंद्र सरकार से 10 दिनों में जवाब दाखिल करने को कहा। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि CBSE ने NEP 2020 के तहत त्रिभाषा नीति को अचानक लागू कर दिया, जबकि इसके लिए 2030 तक का समय था।
वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर ने तर्क दिया कि CBSE के पास ऐसी नीति लागू करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि कई स्कूलों में भारतीय भाषाओं के शिक्षक और पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध नहीं हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दिवान ने कहा कि CBSE ने जून के अंत में कुछ प्रावधानों में ढील दी है, लेकिन मूल चिंताएं बनी हुई हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने उन छात्रों की समस्या उठाई जो पहले से फ्रेंच जैसी विदेशी भाषा पढ़ रहे हैं और अब उन्हें अचानक दो भारतीय भाषाएं पढ़ने को कहा जा रहा है। CBSE ने अदालत को बताया कि उसके 28,800 से अधिक संबद्ध स्कूलों में से लगभग आधे पहले से ही दो या अधिक भारतीय भाषाएं पढ़ा रहे हैं। सरकार ने कहा कि NCERT सभी 22 अनुसूचित भाषाओं में पाठ्यपुस्तकें तैयार कर रहा है।