PoK Protest: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में पिछले एक महीने से जारी विरोध प्रदर्शन अब और तीखा होता जा रहा है। आंदोलन के 30वें दिन प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तानी सेना और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि गोलीबारी में मारे गए अधिकांश लोगों के शव अब तक उनके परिवारों को नहीं सौंपे गए हैं। प्रदर्शनकारियों का यह भी दावा है कि बड़ी संख्या में घायल लोगों का भी कोई पता नहीं है। इन आरोपों के बाद आंदोलन ने नया मोड़ ले लिया है और पाकिस्तान सरकार पर दबाव बढ़ता नजर आ रहा है।
59 लोगों की मौत का दावा, लेकिन सिर्फ 3 शव ही परिजनों को मिले| PoK Protest
प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, 5 जून से शुरू हुई कार्रवाई के दौरान पाकिस्तानी सेना की गोलीबारी में 59 लोगों की मौत हुई, जबकि 218 से ज्यादा लोग घायल हुए। उनका आरोप है कि मरने वालों में से केवल तीन लोगों के शव ही उनके परिवारों को सौंपे गए हैं। बाकी 56 शवों के बारे में अब तक कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। परिजनों का कहना है कि उन्हें यह तक नहीं बताया गया कि शवों का अंतिम संस्कार किया गया, दफनाया गया या वे अब भी किसी पोस्टमार्टम हाउस में रखे हैं।
घायलों के लापता होने का भी आरोप
आंदोलनकारी यह भी आरोप लगा रहे हैं कि गोलीबारी में घायल हुए कई लोगों को अस्पतालों से पाकिस्तानी रेंजर्स अपने साथ ले गए, जिसके बाद उनका अपने परिवारों से कोई संपर्क नहीं हो सका। इसी बीच कुछ तस्वीरें भी सामने आई हैं, जिनमें कथित तौर पर 15 जून को रावलकोट में घायल प्रदर्शनकारियों को पाकिस्तानी रेंजर्स वाहनों में ले जाते हुए देखा गया है। इन तस्वीरों के सामने आने के बाद लोगों में और ज्यादा नाराजगी बढ़ गई है।
सरदार अमान खान बोले- शव मिलेंगे तभी लौटेंगे घर
आंदोलन के प्रमुख आयोजकों में शामिल सरदार अमान खान ने 30वें दिन आयोजित सभा में कहा कि जो नौजवान पहले आटा, बिजली और बुनियादी सुविधाओं की मांग कर रहे थे, आज उनके शव तक परिवारों को नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी अपने साथियों के शवों को कंधा देकर सम्मानपूर्वक घर ले जाना चाहते हैं और जब तक ऐसा नहीं होगा, आंदोलन खत्म नहीं किया जाएगा।
उन्होंने PoK की प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि वहां अदालत और संसद तो मौजूद हैं, लेकिन उनका कोई प्रभाव नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि न्याय व्यवस्था कमजोर हो चुकी है और मौजूदा आंदोलन केवल कुछ मांगों तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम में बदलाव की लड़ाई बन चुका है।
रावलकोट में जारी है धरना, सरकार के खिलाफ नारेबाजी
PoK के कई इलाकों, खासकर रावलकोट में प्रदर्शनकारी लगातार धरना दे रहे हैं। सड़कों पर बड़ी संख्या में लोग पाकिस्तान सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं और अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं। अवामी एक्शन कमेटी के सदस्य मोहम्मद अरबाब ने आरोप लगाया कि सुरक्षा बलों ने महिलाओं, बच्चों और युवाओं तक को नहीं छोड़ा। उन्होंने कहा कि अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि कितने लोग घायल हैं, कितने मारे गए और कितने लापता हैं। उनके मुताबिक, प्रदर्शनकारियों को आतंकवादी बताकर उनकी आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है।
सरकार और सेना को दी खुली चेतावनी
मोहम्मद अरबाब ने पाकिस्तान सरकार और सेना से मांग की कि इलाके से सुरक्षा बलों को हटाया जाए, कर्फ्यू समाप्त किया जाए और सभी मृतकों के शव उनके परिवारों को सौंपे जाएं। उन्होंने कहा कि अपने ही लोगों के शवों का न मिलना किसी भी परिवार के लिए सबसे बड़ा अन्याय है। साथ ही उन्होंने सरकार पर प्रदर्शनकारियों को गलत तरीके से बदनाम करने का भी आरोप लगाया।
38 मांगों की डेडलाइन खत्म, आगे की रणनीति पर नजर
प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान सरकार के सामने 38 मांगें रखी थीं, जिन्हें पूरा करने के लिए समयसीमा तय की गई थी। यह डेडलाइन अब समाप्त हो चुकी है। ऐसे में अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार क्या कदम उठाती है और आंदोलनकारी आगे किस रणनीति के साथ आगे बढ़ते हैं। बताया जा रहा है कि इस आंदोलन को PoK की बड़ी आबादी का समर्थन मिल रहा है।
पहले भी लगते रहे हैं ऐसे आरोप
प्रदर्शन के दौरान यह मुद्दा भी उठाया गया कि पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में भी सुरक्षा बलों पर ऐसे आरोप लगते रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और अन्य क्षेत्रों में भी लोगों को हिरासत में लेने और शवों के गायब होने जैसी घटनाओं के आरोप पहले सामने आते रहे हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पाकिस्तान की ओर से समय-समय पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी जाती रही हैं।
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