New Delhi
नई दिल्ली (19 मई 2026) डीआरडीओ (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन) ने रक्षा के क्षेत्र में एक और उपलब्धि हासिल की है।
आंध्र प्रदेश के कुरनूल के पास डीआरडीओ परीक्षण रेंज में हवा-से-सतह और हवा-से-हवा में मार करने की क्षमता वाले मानवरहित हवाई वाहन से प्रक्षेपित सटीक निर्देशित मिसाइल (यूएलपीजीएम)-वी3 के अंतिम परिशोधित विन्यास के विकास परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं। ये परीक्षण एकीकृत ग्राउंड कंट्रोल सिस्टम (जीसीएस) के माध्यम से संचालित किए गए, जिसका उद्देश्य यूएलपीजीएम हथियार प्रणाली का प्रभावी कमांड एवं नियंत्रण सुनिश्चित करना था। यह जीसीएस प्रणाली अत्याधुनिक तकनीकों से लैस है, जो तत्परता, लक्ष्य निर्धारण और प्रक्षेपण प्रक्रियाओं को स्वचालित बनाकर मिशन की दक्षता और सटीकता को बढ़ाती है।
यूएलपीजीएम मिसाइल को हैदराबाद में इमारत अनुसंधान केंद्र की नोडल प्रयोगशाला के रूप में अन्य डीआरडीओ प्रयोगशालाओं जैसे कि हैदराबाद स्थित रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला (डीआरडीएल), चंडीगढ़ स्थित टर्मिनल बैलिस्टिक्स अनुसंधान प्रयोगशाला (टीबीआरएल), चंडीगढ़ और पुणे में उच्च ऊर्जा सामग्री अनुसंधान प्रयोगशाला (एचईएमआरएल) के साथ मिलकर विकसित किया गया है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, रक्षा उत्पादन भागीदारों और उद्योग जगत को यूएलपीजीएम-वी3 के सफल परीक्षणों के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि टैंक रोधी भूमिका के लिए हवा-से-सतह तथा ड्रोन, हेलीकॉप्टर और अन्य हवाई लक्ष्यों पर हमले के लिए हवा-से-हवा मोड में इसकी सफलता रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक उपलब्धि है।