जयपुर, 21 जुलाई। राजस्थान में मानसून ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। राज्य के पूर्वी, दक्षिणी और कुछ मध्य जिलों में बारिश की गतिविधियां तेज होने की संभावना व्यक्त की गई है। लंबे समय से अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे किसानों और आम लोगों के लिए यह राहत भरी खबर मानी जा रही है। मौसम के बदले मिजाज के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई है, जिससे भीषण गर्मी और उमस से लोगों को काफी राहत मिली है। मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों तक राज्य के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम तथा कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है।
जयपुर, कोटा, भरतपुर, अलवर, धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर, बूंदी, बारां, झालावाड़, उदयपुर, चित्तौड़गढ़ और आसपास के जिलों में अच्छी बारिश की संभावना जताई गई है। कुछ क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं। प्रशासन ने सभी जिलों को सतर्क रहने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक तैयारियां पूरी रखने के निर्देश दिए हैं।
बारिश की शुरुआत के साथ ही किसानों में उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा है। राज्य के अधिकांश हिस्सों में खरीफ फसलों की बुवाई का कार्य जारी है और समय पर होने वाली वर्षा को कृषि के लिए बेहद लाभदायक माना जा रहा है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि पर्याप्त वर्षा होने से बाजरा, मक्का, मूंग, उड़द, सोयाबीन, तिल और अन्य खरीफ फसलों की अच्छी पैदावार की उम्मीद बढ़ जाती है। इससे सिंचाई पर होने वाला खर्च भी कम होगा और किसानों को आर्थिक राहत मिलेगी।
हालांकि विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि लगातार कई दिनों तक अत्यधिक वर्षा होती है तो खेतों में जलभराव की स्थिति बन सकती है। ऐसी स्थिति में फसलों की जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है और उत्पादन प्रभावित होने की आशंका रहती है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने की व्यवस्था पहले से सुनिश्चित करें और मौसम के पूर्वानुमान पर लगातार नजर बनाए रखें।
राजधानी जयपुर में भी बादलों की आवाजाही बढ़ गई है। कई इलाकों में हल्की बारिश दर्ज की गई, जिससे मौसम सुहावना हो गया। सुबह और शाम के समय लोगों ने गर्मी से राहत महसूस की। पार्कों, बाजारों और सार्वजनिक स्थलों पर लोगों की भीड़ बढ़ी और लंबे समय बाद ठंडी हवाओं ने वातावरण को खुशनुमा बना दिया। हालांकि कुछ निचले इलाकों में पानी भरने की समस्या भी सामने आई, जिसके समाधान के लिए नगर निगम की टीमें सक्रिय रहीं।
राज्य सरकार ने जिला प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि जलभराव वाले क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखी जाए। नगर निकायों को नालों की सफाई, जल निकासी व्यवस्था और पंपिंग स्टेशनों को पूरी क्षमता के साथ संचालित करने के लिए कहा गया है। जिन क्षेत्रों में हर वर्ष बारिश के दौरान पानी भरने की समस्या होती है, वहां अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती की गई है ताकि स्थिति को जल्द सामान्य बनाया जा सके।
बारिश के साथ बिजली गिरने की घटनाओं की संभावना को देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान खुले मैदानों में काम करने से बचें। तेज गरज-चमक होने पर पेड़ों के नीचे खड़े न हों और सुरक्षित स्थान पर शरण लें। पशुपालकों को भी अपने पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर रखने की सलाह दी गई है।
पर्यटन उद्योग पर भी मानसून का सकारात्मक प्रभाव दिखाई देने लगा है। माउंट आबू, उदयपुर, कुंभलगढ़, रणकपुर और अन्य पर्यटन स्थलों पर मौसम सुहावना होने से पर्यटकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। बारिश के बाद पहाड़ियों और झीलों का प्राकृतिक सौंदर्य और अधिक आकर्षक हो जाता है, जिससे स्थानीय पर्यटन व्यवसाय को भी लाभ मिलने की संभावना है। हालांकि प्रशासन ने पर्यटकों से अपील की है कि वे पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा करते समय मौसम की जानकारी अवश्य लें और जोखिम वाले स्थानों पर जाने से बचें।
स्वास्थ्य विभाग ने बरसात के मौसम में स्वच्छता बनाए रखने की सलाह दी है। लगातार बारिश के दौरान दूषित पानी और मच्छरों के कारण डेंगू, मलेरिया तथा अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। लोगों से साफ पानी पीने, घरों के आसपास पानी जमा न होने देने और व्यक्तिगत स्वच्छता का विशेष ध्यान रखने की अपील की गई है। अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को भी आवश्यक दवाओं और चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
यातायात विभाग ने वाहन चालकों से अपील की है कि बारिश के दौरान धीमी गति से वाहन चलाएं, फिसलन वाली सड़कों पर विशेष सावधानी बरतें और जलभराव वाले मार्गों से बचें। यदि दृश्यता कम हो तो हेडलाइट का उपयोग करें और पर्याप्त दूरी बनाए रखें। प्रशासन ने कहा है कि सभी संबंधित विभाग पूरी तरह सतर्क हैं और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक संसाधन तैयार रखे गए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आगामी दिनों में मानसून इसी प्रकार सक्रिय बना रहता है तो राज्य के जलाशयों का जलस्तर बेहतर होगा, भूजल स्तर में सुधार आएगा और कृषि उत्पादन को भी बड़ा लाभ मिलेगा। हालांकि इसके साथ ही प्रशासन के लिए चुनौती यह रहेगी कि भारी बारिश के कारण कहीं भी जनजीवन प्रभावित न हो। इसी उद्देश्य से सभी जिलों में लगातार निगरानी रखी जा रही है और आवश्यकतानुसार त्वरित कार्रवाई की तैयारी पूरी कर ली गई है।