संयुक्त राष्ट्र में बुलंद की मुखर आवाज़
New Delhi
नई दिल्ली (21 अक्तूबर 2026) अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मानवाधिकारों के मुद्दे पर अपनाए जा रहे दोहरे रवैये और दोहरे चरित्र को लेकर भारत ने तीखा और स्पष्ट रुख अपनाया है। हाल के दिनों में भारत में हुए प्रदर्शनों और वर्तमान में यूरोप के कई देशों में जारी हिंसक प्रदर्शनों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि भारत के बारे मानवाधिकार संगठन का रवैया कुछ और था जबकि यूरोप हिंसा पर कुछ और, संयुक्त राष्ट्र की एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान भारत ने दो-टूक शब्दों में कहा कि मानवाधिकारों का इस्तेमाल चुनिंदा देशों पर राजनीतिक दबाव बनाने या किसी एक देश को निशाना बनाने के हथियार के रूप में नहीं किया जाना चाहिए।
देश की छवि धूमिल करने की कोशिश बर्दाश्त नहीं
संयुक्त राष्ट्र के इस सत्र में भारत का पक्ष रखते हुए विदेश मंत्रालय की वरिष्ठ राजनयिक बरखा ताम्रकार ने बेहद सख्त लहजे में वैश्विक निकायों को आईना दिखाया। उन्होंने साफ किया कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के खिलाफ बिना किसी पुख्ता दलील और आधार के झूठे आरोप लगाकर उसकी वैश्विक छवि को बदलने या धूमिल करने की किसी भी कोशिश को सहन नहीं किया जाएगा।
पारदर्शिता और बिना भेदभाव संवाद
भारत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मंचों और भारत के बीच का संबंध और सहयोग राजनीति से परे होना चाहिए। भारत के अनुसार, वैश्विक स्तर पर मानवाधिकारों के संरक्षण की दिशा में यह संवाद वार्ता, सहयोग, बिना किसी भेदभाव और पूरी पारदर्शिता के सिद्धांतों पर आधारित होना चाहिए, न कि पक्षपातपूर्ण नीतियों पर।
भारत के इस कड़े रुख से एक बार फिर यह साफ हो गया है कि देश अपने आंतरिक मामलों पर किसी भी प्रकार के बाहरी और राजनीतिक रूप से प्रेरित दबाव को स्वीकार नहीं करेगा।