पेरिस, 21 जुलाई। फ्रांस में बच्चों और किशोरों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर सरकार ने एक बड़ा कदम उठाने की दिशा में प्रगति की है। देश की संसद में एक ऐसे विधेयक पर सहमति बनी है, जिसके तहत 15 वर्ष से कम आयु के बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर रोक लगाने का प्रस्ताव है। सरकार का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ते समय, साइबर बुलिंग, अनुचित सामग्री और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहे प्रभाव को देखते हुए बच्चों के लिए अधिक सुरक्षित ऑनलाइन वातावरण तैयार करना आवश्यक हो गया है।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों लंबे समय से बच्चों की डिजिटल सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात करते रहे हैं। सरकार का कहना है कि आधुनिक तकनीक ने बच्चों को शिक्षा और जानकारी तक आसान पहुंच तो दी है, लेकिन इसके साथ ही कई गंभीर चुनौतियां भी सामने आई हैं। कम उम्र में सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग बच्चों की पढ़ाई, मानसिक स्वास्थ्य, आत्मविश्वास और सामाजिक व्यवहार पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। इसी कारण सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों के लिए अधिक सख्त नियम लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार सोशल मीडिया कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि निर्धारित आयु से कम बच्चे उनके प्लेटफॉर्म का उपयोग न कर सकें। इसके लिए आयु सत्यापन की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। यदि कोई प्लेटफॉर्म नियमों का पालन नहीं करता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। सरकार का उद्देश्य केवल प्रतिबंध लगाना नहीं, बल्कि बच्चों को डिजिटल दुनिया के संभावित खतरों से सुरक्षित रखना है।
हाल के वर्षों में दुनिया भर में बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को लेकर चिंता बढ़ी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक स्क्रीन टाइम के कारण बच्चों की नींद प्रभावित होती है, पढ़ाई पर ध्यान कम होता है और कई मामलों में तनाव, अवसाद तथा आत्मसम्मान से जुड़ी समस्याएं भी सामने आती हैं। इसके अलावा फर्जी जानकारी, ऑनलाइन ठगी, साइबर बुलिंग और अनुचित सामग्री तक आसान पहुंच भी अभिभावकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
फ्रांस सरकार का मानना है कि बच्चों की सुरक्षा केवल परिवारों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि सोशल मीडिया कंपनियों की भी समान जिम्मेदारी है। इसलिए डिजिटल प्लेटफॉर्मों को ऐसे तकनीकी उपाय अपनाने होंगे, जिनसे कम उम्र के उपयोगकर्ताओं की पहचान की जा सके और उन्हें आयु के अनुरूप सुरक्षित अनुभव उपलब्ध कराया जा सके। सरकार का कहना है कि तकनीकी कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म की डिजाइन और एल्गोरिद्म में भी ऐसे बदलाव करने चाहिए, जो बच्चों के हितों को प्राथमिकता दें।
हालांकि इस प्रस्ताव को लेकर विभिन्न पक्षों की अलग-अलग राय सामने आई है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए ऐसे कदम आवश्यक हैं, जबकि कुछ का मानना है कि केवल प्रतिबंध लगाने से समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं होगी। उनका सुझाव है कि बच्चों और अभिभावकों दोनों को डिजिटल साक्षरता की शिक्षा दी जानी चाहिए ताकि वे इंटरनेट का सुरक्षित और जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग कर सकें।
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का भी मानना है कि स्कूलों में साइबर सुरक्षा, ऑनलाइन व्यवहार और डिजिटल जिम्मेदारी जैसे विषयों को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। इससे बच्चे इंटरनेट का सही उपयोग करना सीखेंगे और ऑनलाइन खतरों की पहचान भी कर सकेंगे। अभिभावकों को भी बच्चों के डिजिटल व्यवहार पर नियमित नजर रखने और उनके साथ खुलकर संवाद करने की सलाह दी जा रही है।
तकनीकी कंपनियों के सामने भी इस प्रस्ताव के लागू होने पर नई चुनौतियां आएंगी। उन्हें आयु सत्यापन प्रणाली को अधिक विश्वसनीय बनाना होगा, साथ ही उपयोगकर्ताओं की निजता की सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि सुरक्षा और गोपनीयता के बीच संतुलन बनाए रखना इस प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण पहलू होगा।
दुनिया के कई अन्य देशों में भी बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर नए नियमों पर विचार किया जा रहा है। कई सरकारें सोशल मीडिया कंपनियों से अधिक जवाबदेही की मांग कर रही हैं ताकि इंटरनेट बच्चों के लिए सुरक्षित बनाया जा सके। फ्रांस का यह कदम वैश्विक स्तर पर चल रही उसी पहल का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें डिजिटल प्लेटफॉर्मों को बच्चों की सुरक्षा के प्रति अधिक जिम्मेदार बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
यदि यह प्रस्ताव पूरी तरह लागू होता है तो फ्रांस उन देशों में शामिल हो जाएगा जिन्होंने बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को लेकर सबसे सख्त नियम अपनाए हैं। सरकार का कहना है कि आने वाले समय में इन नियमों की प्रभावशीलता का नियमित मूल्यांकन किया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर उनमें सुधार भी किए जाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी प्रगति के इस दौर में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार, अभिभावकों, शिक्षकों और डिजिटल कंपनियों को मिलकर काम करना होगा, तभी एक सुरक्षित और संतुलित डिजिटल वातावरण तैयार किया जा सकेगा।